एक पंगत-एक संगत”का आह्वान हुआ चरितार्थ, राजकीय विद्यालय परिसर में गूंजे जयघोष

एक पंगत-एक संगत”का आह्वान हुआ चरितार्थ, राजकीय विद्यालय परिसर में गूंजे जयघोष
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शाहपुरा (किशन वैष्णव)पनोतिया मंडल के गांवों द्वारा राजकीय उच्च माध्यमिक के मैदान में आयोजित विराट हिन्दू सम्मेलन ने क्षेत्र को सनातन चेतना, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक गौरव से ओत-प्रोत कर दिया। यह आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सकल हिन्दू समाज की एकता, संगठन और संस्कारों का भव्य प्रदर्शन बनकर सामने आया।सम्मेलन में शोभायात्रा में मंडल के विभिन्न गांवों से डीजे,आकर्षक झांकियों और गूंजते धार्मिक जयघोषों के साथ विशाल शोभायात्रा ने सनातन की एकता में जोश भर दिया। पनोतिया मंडल के विभिन्न गांवों से हजारों सनातनी हिंदुओं ने उत्साह और अनुशासन के साथ भाग लिया शोभायात्रा में डीयास, बड़ला, गेगवा, नई राज्यास, नाथडीयास सहित पनोतिया मंडल के अलग-अलग गांवों के डीजे वाहन और भव्य धार्मिक झांकियां शामिल हुईं। ट्रैक्टरों पर भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, माता जानकी, भगवान शिव एवं देवरिया बालाजी की सजीव झांकियों ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। पूरे मार्ग में जय श्रीराम, हर-हर महादेव और भारत माता की जय के उद्घोष गूंजते रहे। भगवा ध्वजों, भक्ति संगीत और पुष्पवर्षा के साथ निकली शोभायात्रा ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय वातावरण में परिवर्तित कर दिया।

शोभायात्रा में महिला शक्ति की विशेष उपस्थिति देखने को मिली तथा शोभायात्रा के पश्चात विराट हिन्दू सम्मेलन का मुख्य कार्यक्रम राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय,पनोतिया परिसर में आयोजित किया गया, जहां विशाल धर्मसभा का आयोजन हुआ।

धर्मसभा में पधारे साधु-संतों एवं अतिथियों का पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ अर्पणा पहनाकर, श्रीफल भेंटकर भव्य स्वागत किया गया। आयोजन समिति एवं ग्रामवासियों द्वारा मंचासीन संत-महात्माओं और अतिथियों का अभिनंदन किया गया।धर्मसभा में धर्मगुरु संत श्री 1008 महंत निर्मल राम महाराज वरिष्ठ संत, रामद्वारा लुलांस, संत रामचरण महाराज पिछोला धाम, सत्यनारायण कुमावत राजस्थान क्षेत्र सह संयोजक,प्रज्ञा प्रवाह, तथा इंदिरा धूपिया संगठन मंत्री,राजस्थान शिक्षक संघ, अजमेर संभाग उपस्थित रहे।

धर्मसभा के संतो के मुख्य वक्ता के रूप में संत निर्मल राम महाराज ने कहा कि सनातन धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन को मर्यादा, सेवा और समर्पण की दिशा देने वाली शाश्वत परंपरा है। हिन्दू समाज को संगठित रहने और अपनी संस्कृति की रक्षा करने का आह्वान किया।मुख्य वक्ता डॉ:सत्यनारायण कुमावत ने अपने संबोधन में कहा कि सत्ययुग में शास्त्रों में किसी प्रकार का भेदभाव या छुआछूत नहीं थी। उन्होंने कहा कि उस समय समाज में समानता और न्याय का शासन था। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि भगवान श्रीकृष्ण के समय उनके मंत्री विदुर भी सेना के मुख्यमंत्री सेना प्रमुख थे। विदुर ने अपनी योग्यता, ज्ञान और धर्म की प्रतिष्ठा के आधार पर यह पद प्राप्त किया था और उन्होंने कभी किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया।

सत्यनारायण कुमावत ने कहा कि यह सनातन समाज की महानता है कि यहाँ जाति, वर्ग या संपत्ति के आधार पर भेदभाव नहीं, बल्कि ज्ञान, योग्यता और धर्म की प्रतिष्ठा को प्राथमिकता दी जाती थी। उन्होंने कहा कि आज के समय में भी हमें इसी परंपरा को अपनाकर समाज में एकता और समानता को स्थापित करना होगा।उन्होंने कहा कि हिन्दू समाज को अपने भीतर के मतभेदों को मिटाकर एक सूत्र में बंधकर कार्य करना चाहिए। केवल संगठन और जागरूकता से ही समाज में वास्तविक शक्ति उत्पन्न होगी और देश में हिन्दू समाज का प्रभाव स्थापित होगा।

मुख्य वक्ता इंदिरा धूपिया संगठन मंत्री, राजस्थान शिक्षक संघ ने मातृशक्ति की भूमिका, संस्कारयुक्त शिक्षा और समाज निर्माण में शिक्षकों की जिम्मेदारी पर प्रकाश डाला।धर्मसभा के दौरान वक्ताओं ने सकल हिन्दू समाज से एकजुट रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हिन्दू समाज की सबसे बड़ी शक्ति उसकी एकता, संगठन और संस्कार हैं। जाति, वर्ग और क्षेत्रीय भेदभाव से ऊपर उठकर समाज को धर्महित और राष्ट्रहित में कार्य करना होगा।

वक्ताओं ने कहा कि दसवें गुरु गुरु गोविंद सिंह महाराज द्वारा दिया गया “एक पंगत, एक संगत” का महान आह्वान इस विराट हिन्दू सम्मेलन में पूर्ण रूप से चरितार्थ हुआ। सम्मेलन में बिना किसी भेदभाव के समाज के सभी वर्गों के लोग एक मंच, एक उद्देश्य और एक विचार के साथ उपस्थित रहे, जो सामाजिक समरसता और भाईचारे का जीवंत उदाहरण बना।आयोजन समिति के अध्यक्ष गोपाल धनरिया ने बताया कि आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले संत-महात्माओं, अतिथियों, ग्रामवासियों, युवाओं और कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज में सेवा, संगठन और समर्पण की भावना को और सुदृढ़ करते हैं।

विराट हिन्दू सम्मेलन में पनोतिया मंडल सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु, समाजसेवी, महिलाएं और युवा उपस्थित रहे। अनुशासन, श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न यह आयोजन क्षेत्र में लंबे समय तक स्मरणीय रहेगा।विराट हिन्दू सम्मेलन ने पनोतिया मंडल में सनातन एकता, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक जागरण का सशक्त संदेश देते हुए नई ऊर्जा का संचार किया।

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