अणुव्रत दिवस संगोष्ठी में गूंजा संयम और सदाचार का सिंहनाद: शाहपुरा में गूंजे नैतिक संकल्प

अणुव्रत दिवस संगोष्ठी में गूंजा संयम और सदाचार का सिंहनाद: शाहपुरा में गूंजे नैतिक संकल्प
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शाहपुरा। मूलचन्द पेसवानी

अणुव्रत अनुशास्ता आचार्य तुलसी द्वारा प्रवर्तित अणुव्रत आंदोलन की उजली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अणुव्रत समिति शाहपुरा ने अणुव्रत विश्व भारती के तत्वावधान में रविवार को मातृछाया शाहपुरा में आचार्य तुलसी का 112वां जन्मोत्सव अणुव्रत दिवस संगोष्ठी के रूप में श्रद्धा और संकल्प के साथ मनाया। कार्यक्रम समिति अध्यक्ष रामस्वरूप काबरा के सान्निध्य में संपन्न हुआ।

संगोष्ठी में मुख्य अतिथि शिक्षाविद बालकृष्ण पंचोली एवं संचिना कला संस्थान के अध्यक्ष रामप्रसाद पारीक रहे। विशिष्ट उपस्थिति में समिति के पूर्व अध्यक्ष सोमेश्वर व्यास, विक्रम सिंह शक्तावत, एडवोकेट जितेंद्र पाराशर, दिनेश बलाई, सांवरिया लाल गाडरी, कोषाध्यक्ष कैलाशचंद्र शर्मा, पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी शंकरलाल जोशी, पूर्व शिक्षा उपनिदेशक तेजपाल उपाध्याय, विष्णुदत्त शर्मा, जगदीश जाट, पूर्व बैंक मैनेजर अखिल व्यास, जीवराज जाट, मूलचन्द पेसवानी मौजूद रहे।

संचिना अध्यक्ष रामप्रसाद पारीक ने कहा कि अणुव्रत के सिद्धांतों पर चलना आज के समाज में कठिन हो गया है। समाज स्वयं सिद्धांतों को ताक पर रख व्यक्ति को भटकाने का वातावरण बना रहा है। ऐसे विकट समय में संयम और मर्यादा की राह पकड़ना चुनौतीपूर्ण अवश्य है, पर यही सच्चा साहस है।

“तुलसी सिंहनाद” विषय पर वक्ताओं ने संयम, सत्य और सदाचार को जीवन में उतारने का आह्वान किया। संगोष्ठी में उपस्थित सदस्यों ने नैतिक मूल्यों के पालन का सामूहिक संकल्प लिया। उर्मिला कुम्हार ने अणुव्रत गीत प्रस्तुत किया, जबकि ओमप्रकाश माली अंगारा ने अणुव्रत गीत की विस्तार से व्याख्या प्रस्तुत कर उसके भावार्थ और जीवनोपयोगी संदेशों को सरल शब्दों में समझाया।

समिति अध्यक्ष रामस्वरूप काबरा ने आचार्य तुलसी के आदर्शों पर चलने की आवश्यकता पर बल दिया। मंत्री गोपाल पंचोली ने आत्मशुद्धि और समाज-शुद्धि को सच्ची श्रद्धांजलि बताया। उन्होंने तेरापंथ के नौवें अधिशास्ता आचार्य तुलसी द्वारा अणुव्रत स्थापना के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “अणुव्रत के माध्यम से छोटे-छोटे संकल्प अपनाकर मानव जीवन में नैतिकता की मजबूत नींव रखी जा सकती है।”

इस अवसर पर उपस्थित सदस्यों ने “संयममय जीवन हो” अणुव्रत गीत का सामूहिक गायन किया, जिससे संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत हो गया। अंत में समिति अध्यक्ष काबरा ने घोषणा की कि आगामी मई माह में शाहपुरा में अणुव्रत आंदोलन को और अधिक गतिशील बनाने हेतु सात दिवसीय अणुव्रत शिविर आयोजित किया जाएगा। उन्होंने सभी का आभार व्यक्त करते हुए आंदोलन से अधिकाधिक लोगों को जोड़ने तथा समाज सुधार के साथ आत्म-सुधार का संकल्प लेने का आह्वान किया।

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