वर्ष 2026, शाहपुरा की उम्मीदों, अधिकारों और आत्मसम्मान का वर्ष

शाहपुरा (मूलचन्द पेसवानी)। शाहपुरा की वह धरती जिसने देश में सबसे पहले उत्तरदायी शासन की स्थापना कर लोकतंत्र का प्रहरी बनने का गौरव प्राप्त किया। मेवाड़ के समकक्ष रही शाहपुरा रियासत भले ही आजादी के इतने दशकों बाद भी जिला बनने का सपना पूरा नहीं कर सकी हो, लेकिन अपने गौरवशाली अतीत से सीख लेकर शाहपुरा ने न कभी झुकना सीखा और न ही रुकना। वर्ष 2025 को विदाई देकर आज शाहपुरा वर्ष 2026 में नए संकल्पों और नई उम्मीदों के साथ प्रवेश कर चुका है।
वर्ष 2026 शाहपुरा के लिए चुनावी वर्ष भी है। इस वर्ष नगर पालिका के चुनाव होंगे, शाहपुरा पंचायत समिति के साथ-साथ नवगठित फुलियाकलां पंचायत समिति के प्रथम चुनाव संपन्न होंगे, वहीं ग्राम पंचायत चुनाव भी होंगे। यह वर्ष लोकतांत्रिक चेतना और जनभागीदारी को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है।
सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी 2026 शाहपुरा के लिए विशेष है। फूलडोल महोत्सव अपने पारंपरिक रंगों के साथ सांस्कृतिक व आध्यात्मिक महोत्सव के रूप में मनाया जाएगा। साथ ही रामस्नेही संप्रदाय के संस्थापक महाप्रभु रामचरणजी महाराज का प्राकट्य महोत्सव भी शाहपुरा में श्रद्धा और भक्ति के साथ आयोजित होगा।
चुनावी वर्ष होने के कारण क्षेत्रीय विधायक डॉ. लालाराम बैरवा के प्रयासों से राज्य सरकार की ओर से शाहपुरा के विकास को लेकर नई घोषणाओं की उम्मीद है। साथ ही वर्ष 2025 में घोषित योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की अपेक्षा भी आमजन को है।
नववर्ष 2026 शाहपुरा के लिए केवल नई तारीख नहीं, बल्कि नई दिशा, नए संकल्प और नई सोच का संदेश लेकर आया है। बीते वर्षों के संघर्षों, आंदोलनों और जन-आवाज ने यह साफ कर दिया है कि अब शाहपुरा केवल आश्वासनों से संतुष्ट नहीं होगाकृउसे ठोस परिणाम चाहिए। यही कारण है कि 2026 को शाहपुरा विकास, पहचान और अधिकारों के वर्ष के रूप में देखा जा रहा है।
शाहपुरा की सबसे बड़ी अपेक्षा उसकी प्रशासनिक पहचान और सशक्त व्यवस्था से जुड़ी है। क्षेत्रवासी चाहते हैं कि शासन-प्रशासन जनता की आवाज को गंभीरता से सुने और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप निर्णय ले। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल और रोजगार जैसे बुनियादी मुद्दों पर ठोस प्रगति ही 2026 की पहली कसौटी होगी।
शिक्षा के क्षेत्र में शाहपुरा को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षण संस्थानों, तकनीकी प्रशिक्षण केंद्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी सुविधाओं की आवश्यकता है। युवा चाहते हैं कि उन्हें अपने ही क्षेत्र में आगे बढ़ने के अवसर मिलें, ताकि पलायन की मजबूरी समाप्त हो।
स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी बड़ी अपेक्षाएं हैं। आमजन चाहता है कि जिला अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सक, आईसीयू सुविधा, आधुनिक जांच संसाधन और समयबद्ध उपचार सुनिश्चित हो। उम्मीद है कि 2026 में स्वास्थ्य सेवाएं कागजों से निकलकर जमीनी हकीकत बनें।
कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था शाहपुरा की रीढ़ है। किसान सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, फसलों के उचित मूल्य और कृषि आधारित उद्योगों की स्थापना की आस लगाए बैठे हैं। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
युवाओं और महिलाओं के लिए 2026 नए अवसरों का वर्ष बनेकृयही सामूहिक अपेक्षा है। स्वरोजगार, लघु उद्योग, स्वयं सहायता समूह और कौशल विकास योजनाएं यदि प्रभावी ढंग से लागू हों, तो शाहपुरा आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ सकता है।
सांस्कृतिक और सामाजिक चेतना को लेकर भी उम्मीदें जुड़ी हैं। शाहपुरा की सांस्कृतिक विरासत, साहित्य, खेल और सामाजिक समरसता को नया मंच मिले। फूलडोल महोत्सव को सरकारी महोत्सव का दर्जा मिले और पुष्कर महोत्सव की तर्ज पर सरकार की सक्रिय भागीदारी तय हो।
धनोप शक्तिपीठ, चलानिया भेरूनाथ और धानेश्वर तीर्थ संगम का आध्यात्मिक व पर्यटन की दृष्टि से विकास हो। साथ ही क्रांतिकारी बारहठ परिवार का पैनोरमा, रामस्नेही संप्रदाय का पैनोरमा, खेल अकादमी और आधुनिक ऑडिटोरियम का निर्माण भी क्षेत्र की पुरानी मांग है।
कुल मिलाकर, वर्ष 2026 शाहपुरा के लिए केवल कैलेंडर का बदलाव नहीं, बल्कि विश्वास की पुनर्स्थापना का अवसर है। यदि सरकार, जनप्रतिनिधि और आम नागरिक संकल्प के साथ आगे बढ़ें, तो यह वर्ष शाहपुरा के भविष्य की मजबूत नींव रख सकता है। शाहपुरा की यही आशा है कि वर्ष 2026 विकास, सम्मान और उज्ज्वल भविष्य का प्रतीक बने और शाहपुरा अपने गौरवशाली इतिहास को कायम रखते हुए नई ऊँचाइयों को छुए।
