शाहपुरा में एलआईसी कर्मियों की हड़ताल से ठप रहा कामकाज, मुख्य द्वार पर दिया धरना

शाहपुरा। मूलचन्द पेसवानी अखिल भारतीय बीमा कर्मचारी संघ एवं संयुक्त यूनियनों के आह्वान पर आज एलआईसी कर्मियों ने हड़ताल कर एलआईसी कार्यालय के बाहर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। हड़ताल के कारण पूरे दिन कार्यालय में किसी भी प्रकार का लेन-देन नहीं हो सका, जिससे बीमा उपभोक्ताओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। कर्मचारियों ने मुख्य द्वार को बंद कर बाहर ही धरना दिया और केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। धरना व प्रदर्शन में शाखा सचिव मोहम्मद अली, उम्मेद खान, प्रभात कुमार, अनिश कुमार, रामेश्वर लाल कहार, मनोज कुमार, महाबीर शर्मा, सुरेन्द्र सिंह, ऋषभ, अनुराग रोसिया, रौनक जोशी, भेरू मौजूद रहे।
धरने पर बैठे कर्मचारियों ने कहा कि बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत एफडीआई लागू करने का निर्णय जनविरोधी है। इससे सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियां कमजोर होंगी और निजी कंपनियों को सीधा लाभ मिलेगा। कर्मचारियों का आरोप है कि इससे रोजगार के अवसर घटेंगे और देश की पूंजी धीरे-धीरे विदेशी कंपनियों के हाथों में चली जाएगी। उन्होंने कहा कि बीमा जैसे संवेदनशील क्षेत्र का पूर्ण निजीकरण देशहित में नहीं है।
प्रदर्शनकारियों ने अमानवीय श्रम कानूनों का भी कड़ा विरोध किया। उनका कहना था कि नए श्रम कानूनों से श्रमिकों के मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है और इनसे केवल बड़े पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाया जा रहा है। कर्मचारियों ने नारे लगाते हुए कहा कि “निजीकरण बंद करो”, “एफडीआई वापस लो” और “कर्मचारी विरोधी नीतियां नहीं चलेंगी।”
संघ की ओर से सरकार के समक्ष प्रमुख मांगें रखी गईं। इनमें बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत एफडीआई के निर्णय को तत्काल वापस लेने, नई भर्तियां शुरू करने, पुरानी पेंशन योजना को पुनः लागू करने तथा कर्मचारियों से जुड़े सभी लंबित मामलों का शीघ्र समाधान करने की मांग शामिल है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
हड़ताल के चलते एलआईसी कार्यालय में दिनभर सन्नाटा पसरा रहा। प्रीमियम जमा कराने, पॉलिसी संबंधी कार्य और अन्य सेवाओं के लिए पहुंचे उपभोक्ताओं को बिना काम कराए लौटना पड़ा। इससे लोगों में नाराजगी भी देखने को मिली।
धरने में बड़ी संख्या में एलआईसी कर्मियों ने भाग लिया और एकजुटता के साथ प्रदर्शन किया। प्रशासन की ओर से स्थिति पर नजर रखी गई और किसी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं हुई। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन केवल अपने अधिकारों के लिए ही नहीं, बल्कि सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों के भविष्य को बचाने के लिए भी है।
