बीस वर्षों से जनसेवा में समर्पित सामाजिक कार्यकर्ता को अब तक सरकारी सम्मान नहीं

बनेड़ा उपखंड क्षेत्र के उपरेड़ा पंचायत निवासी सामाजिक कार्यकर्ता मुबारक हुसैन मंसूरी पिछले बीस वर्षों से लगातार समाज और क्षेत्र के विकास के लिए निस्वार्थ भाव से कार्य कर रहे हैं, लेकिन आज तक उन्हें किसी भी सरकारी मंच पर सम्मानित नहीं किया गया। न तो स्वतंत्रता दिवस पर और न ही गणतंत्र दिवस या किसी अन्य सरकारी अवसर पर उनके कार्यों की औपचारिक सराहना की गई है, जो कई सवाल खड़े करता है।
मुबारक हुसैन मंसूरी ने बिना किसी जाति, धर्म या स्वार्थ के सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय की भावना से समाज सेवा को अपना लक्ष्य बनाया। उन्होंने अपने पंचायत क्षेत्र उपरेड़ा में सीनियर स्कूल, पीएचसी अस्पताल, बोर्ड सेंटर, नवीन आंगनवाड़ी खुलवाने, पेयजल के लिए नए हैंडपंप, स्टेट हाईवे 39 ए हुरड़ा बनेड़ा सड़क की मांग सहित दर्जनों गांवों की विकास से जुड़ी मांगों को लगातार सरकार तक पहुंचाया।
उन्होंने बनेड़ा उपखंड ही नहीं बल्कि पूरे भीलवाड़ा जिले में कच्ची सड़कों के डामरीकरण, शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार के लिए अपनी लेखनी के माध्यम से आवाज उठाई। जनसंपर्क पोर्टल, मुख्यमंत्री पोर्टल, प्रधानमंत्री सड़क एप, सतर्कता प्रकोष्ठ और 181 संपर्क जैसे हर संभव मंच का उपयोग कर उन्होंने लाखों पत्राचार किए और जनहित के मुद्दों को प्रशासन और सरकार के सामने रखा। अलग अलग सरकारें रही हों, लेकिन उन्होंने कभी भी अपनी आवाज उठाने में पीछे कदम नहीं रखा।
उनकी निरंतर कोशिशों से कई जनहित मांगें पूरी भी हुईं, इसके बावजूद उपखंड स्तर से लेकर जिला स्तर तक उन्हें कभी सम्मानित नहीं किया गया। जबकि उनकी कार्यशैली, समर्पण और प्रभाव को देखते हुए वे राज्य या केंद्र स्तर पर सम्मान पाने की योग्यता रखते हैं। राजनीतिक समीकरणों और प्रशासनिक सहयोग के अभाव में उनका योगदान अब तक औपचारिक मान्यता से वंचित रहा है।
मुबारक हुसैन मंसूरी शिक्षा को बढ़ावा देने, क्षेत्रीय विकास को गति देने और अपनी मंसूरी समाज को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए भी सक्रिय रहे हैं। उन्होंने समाज में कुरीतियों को दूर करने, मृत्यु भोज निवारण जैसे सामाजिक अभियानों में भाग लिया और पिछड़े वर्गों को आगे लाने का लगातार प्रयास किया। इसी क्रम में उन्होंने 7 जून 2023 से 19 जून 2023 तक भीलवाड़ा से मुख्यमंत्री आवास तक भीषण गर्मी में पैदल पदयात्रा कर मंसूरी विकास बोर्ड की मांग को मजबूती से उठाया।
ऐसे समर्पित सामाजिक कार्यकर्ता को सम्मान न मिलना न केवल उनके लिए बल्कि समाज के लिए भी हतोत्साहित करने वाला है। यदि ऐसे लोगों को पहचान और सम्मान नहीं मिलेगा, तो भविष्य में जनहित और गरीबों की आवाज उठाने वाले लोग पीछे हट सकते हैं। जिला प्रशासन भीलवाड़ा और राज्य सरकार से अपेक्षा है कि ऐसे निस्वार्थ सामाजिक कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने के लिए उन्हें गणतंत्र दिवस या राज्य स्तर पर सम्मानित किया जाए, ताकि समाज सेवा की भावना को नई ऊर्जा मिल सके।
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