श्री औंकारेश्वर महादेव मूर्ति स्थापना, महारुद्र यज्ञ एवं नानी बाई का मायरा कथा महोत्सव

राजसमन्द (राव दिलीप सिंह)मनुष्य अपने जीवन में बाहरी वस्तुओं से दुखी हो रहा है, जिससे बचने के लिए हमारे देश को तीर्थ और देशवासियों का जीवन तीर्थमय बनाना बेहद जरूरी है।
यह विचार ओजस्वी कथावाचक अनिरुद्ध मुरारी ने व्यक्त किए। मध्यप्रदेश के रतलाम से आए कथावाचक मुरारी सौ फीट रोड पर बालाजी नगर में श्री औंकारेश्वर महादेव मंदिर में मूर्ति स्थापना को लेकर आयोजित पांच दिवसीय महोत्सव के तहत तीन दिवसीय नानी बाई का मायरा कथा के पहले दिन सोमवार रात को श्रद्धालुओं श्रोताओं के समक्ष कथावाचन कर रहे थे। उन्होंने पहले दिन विधि-विधन से व्यासपीठ की पूजन कर नानी बाई का मायरा कथा का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि हम भाग्यशाली हैं कि भारती की पुण्य भूमि पर जन्म मिला है। भारत को मां कहलाने का गौरव प्राप्त है। मां का दर्जा ऊंचा होता है, जो किसी और देश को प्राप्त नहीं है। हमारे देश की धरती को भारत माता, धरती माता आदि नामों से जाना जाता है, जो काफी सम्माननीय है। यही नहीं हमारे शास्त्र भी कहते हैं मातृ देवोभव: पितृदेवो भव: आचार्य देवो भव: और इन सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्र देवो भव:। उन्होंने कहा कि जिस देश में इतनी महान संस्कृति हो वह देश कितना महान और वहां के लोग कितने सभ्य और संस्कृतिवान होंगे यह अनुमान सहज ही लगाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि इन स्थितियों में हमें पाश्चात्य संस्कृति के अनुकरण से बचते हुए हमारे देश की महान संस्कृति की रक्षा करनी है और आने वाली पीढ़ी तक इसका हस्तांतरण भी करना है। उन्होंने कहा कि पाश्चात्य संस्कृति महानगरों, शहरों से होते हुए गांव-कस्बों में प्रवेश कर रही है। ऐसे में हमें सावधान रहते हुए अपनी मर्यादाओं का पालन करने की जरूरत है। कथा में पहले दिन उन्होंने गुजरात में नरसी मेहता के जन्म और उनके बोल नहीं सकने पर एक संत के पास ले जाने पर उसके द्वारा राधे-कृष्णा बुलवाने पर नरसी की बोली खुलने और उनके द्वारा सबसे पहले राधा-कृष्णा बोलने तथा बाद में व्यापार में लगने की कथा श्रद्धालुओं को श्रवण करवाई। इस दौरान कथा प्रसंग के अुनसार श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेवा, सहित कई मधुर भजनों की भी प्रस्तुतियां दीं, जिन पर श्रद्धालु भावविभोर होकर नाचने लगे।
इससे पूर्व प्रतिष्ठा महोत्सव के दूसरे दिन मंगलवार प्रात: 9 बजे से महारुद्र यज्ञ का शुभारंभ हुआ, जिसमें देर शाम तक आहुतियां लगाई गई। यज्ञ में दो दर्जन से अधिक श्रद्धालु जोड़ों ने आहुतियां दीं। अपरान्ह सवा चार बजे संत बिहारीदास, संत श्यामदास की मौजूदगी में यज्ञाचार्य पं. उमेश द्विवेदी के सान्निध्य में जितेंद्र शर्मा, औंकारेश्वर महादेव कार्यकारिणी के सचिव शशिकांत दीक्षित ने वैदिक मंत्रोचार से ओम महाकालेश्वर महादेव की प्रतिमाएं, जिसमें शिवलिंग, ध्वजदंड, पार्वती मैया, गौरी पुत्र गणेश, नंदी महाराज, नाग देवता, त्रिशूल सहित सेवा-पूजा सामग्री को अन्न-धन समर्पित कर मूर्ति अधिवास किया। इन प्रतिमाओं का बुधवार को फल और गुरुवार को फूलों में रखकर मूर्ति अधिवास किया जाएगा।
पूजा-अनुष्ठान के दौरान औंकारेश्वर महादेव मंदिर कार्यकारिणी के अध्यक्ष महंत श्यामदास महाराज, वरिष्ठ उपाध्यक्ष शिवराज सिंह चौहान, उपाध्यक्ष कैलाश भोई, सचिव पंडित शशिकांत दीक्षित, संयुक्त सचिव चंपालाल भोई, कोषाध्यक्ष सुनील डूंगरवाल, सह कोषाध्यक्ष परमानंद माली, संगठन मंत्री सुरेश भाट, प्रचार-प्रसार प्रमुख दीपक सोनी, एडवोकेट बाबूलाल माली, गंगाराम भोई, श्यामलाल भोई, प्रहलाद लड्ढ़ा, देवीलाल गुर्जर, गौतम भोई, मदन गुर्जर, पिंटू भोई, चेतन भोई, राकेश भोई, सोहनलाल टांक, कन्हैयालाल टांक, कुलदीप भोई, देवीलाल गुर्जर, शैलेंद्र त्रिपाठी, अशोक डूंगरवाल, चेतन माली, विनोद आचार्य, अचल धर्मावत, घीसुलाल भोई, घासीराम माली, सोनासिंह, जया माली, पूजा पालीवाल, टीना पालीवाल, प्रेक्षा सेन, पूजा निष्कलंक, सोनम गुप्ता, जमना माली, अनीता माली, हेमलता माली सहित श्रद्धालु मौजूद थे।
