प्रधानमंत्री आये देवभक्त बनकर, लेकिन देवभक्तों को कर गये निराश ...

भीलवाड़ा राजकुमार माली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मालासेरी पहुंचे तो देवभक्त बनकर, लेकिन कई दिनों से आस लगाये बैठे देवभक्तों को खुश नहीं कर पाये और उन्हें निराश कर लौट गये। देवभक्तों को पूरा विश्वास था कि प्रधानमंत्री मोदी देवनारायण कोरिडोर की घोषणा करेंगे, जिससे इस क्षेत्र का बड़ा विकास होगा, लेकिन मोदी ने एक भी घोषणा नहीं की।
कई दिनों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मालासेरी आगमन को लेकर यह बात सामने आ रही थी कि वाराणसी, उज्जैन की तर्ज पर मालासेरी डूंगरी का भी विकास होगा और देवनारायण सर्किट की घोषणा होगी। देवभक्तों में इस बात को लेकर भी उत्साह था कि प्रधानमंत्री से पहले जो बड़े नेता यहां आये, उन्होंने ये ही संकेत दिया कि देवनारायण कोरिडोर के लिए प्रधानमंत्री ने चर्चा की है। सर्वे करवाया है। इसे लेकर मालासेरी डूंगरी, सवाईभोज, बंक्यारानी के साथ ही दस किलोमीटर के दायरे में आ रहे धर्मस्थलों का विकास होगा। यहां लोगों की आवाजाही बढ़ेगी और रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने उद्बोधन में गुर्जरों को रिझाने का प्रयास तो किया और वे खुद भी प्रधानमंत्री न होकर देवभक्त के रूप में यहां आने और देश की उन्नति के लिए देवनारायण भगवान से प्रार्थना करने की बात कही। गुर्जरों के योगदान की चर्चा की। इससे उद्बोधन के बीच भी लग रहा था कि अंत तक घोषणा होगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं किया। प्रधानमंत्री मोदी जहां भी जाते हैं, जहां वे कुछ देकर आते हैं। बड़ा करके आते हैं। भगवान देवनारायण से उन्होंने आशीर्वाद लिया, लेकिन देवनारायण को कोई चीज सार्वजनिक रूप से अर्पण नहीं की। गुर्जर समाज ही नहीं, बल्कि आम लोगों और आसींद क्षेत्र के बाशिंदों को तो उम्मीद थी कि इस क्षेत्र के विकास के लिए कुछ तो जरुर मिलेगा, लेकिन मोदी ने बिना किसी घोषणा के ही भाषण समाप्त कर दिया। इसी के साथ कार्यकर्ताओं और आमजन में यह चर्चा शुरु हो गई कि वे खाली हाथ आये और खाली हाथ लौट गये।
