VIDEO भीलवाड़ा में आतंक फैलाने वाले 15 बंदर पिंजरे में कैद, अभी खत्म नहीं हुआ उत्पात, जारी रहेगी धरपकड़

भीलवाड़ा (प्रह्लाद तेली/ संपत माली) । भीलवाड़ा के पुराने शहर इलाके में आमजन में आतंक का पर्याय बने बंदरों की धरपकड़ शुरु हो चुकी है। इसके लिए जयपुर से टीम बुलाई गई है। दोपहर तक 15 बंदर पकड़े जा चुके थे। इनमें 14 फिमेल और एक मेल शामिल हैं। हालांकि बंदरों की दहशत अभी खत्म नहीं हो पाई है। टीम इंचार्ज का कहना है कि अभी यह नहीं कहा जा सकता कि लोगों पर हमला करने वाले बंदर पिंजरे में कैद हो चुके हैं। ऐसे में अभी बंदरों की धरपकड़ की कार्रवाई एक-दो दिन और चलेंगी। वहीं दूसरी और नगर परिषद आयुक्त ने कहा कि जल्द ही आमजन को बंदरों के उत्पात से राहत दिलाई जायेगी।
बता दें कि भीलवाड़ा में पुराने शहर के विभिन्न इलाकों में पिछले एक सप्ताह से बंदरों का उत्पात जारी है। ये उत्पाती बंदर अब तक 50 से ज्यादा लोगों पर हमला कर उन्हें जख्म दे चुके हैं। शुक्रवार को जिला कलेक्टर आशीष मोदी ने इस मामले को गंभीरता से लिया और वन विभाग व नगर परिषद को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए । इसके बाद उत्पाती बंदरों को कैद करने वाली जयपुर की गारगी एनीमल्स केचर एंड कंट्रोल सर्विस प्रावाइडर संस्था को भीलवाड़ा बुलाया गया। विजय पाल सिंह के नेतृत्व में आई इस टीम ने शनिवार सुबह नगर परिषद के जमादारों को साथ लेकर पुराने शहर में उत्पाती बंदरों की धरपकड़ की कार्रवाई शुरु की। दोपहर तक 15 बंदरों को इस टीम ने पिंजरों में कैद कर लिया था। टीम इंचार्ज विजय पाल ने बताया कि इन बंदरों में 14 फिमेल और एक मेल हैं। उन्होंने बताया कि दरअसल बंदरों की दो टीमें होती है। एक फिमेल और दूसरी मेल टीम। फिमेल टीम के साथ एक मेल, जबकि दूसरी टीम में सभी मेल बंदर होते हैं। इसी घुसपैठ को लेकर अक्सर इन बंदरों में झगड़ा होता है और ये उत्पात मचाते हुये आमजन को अपना निशाना बना लेते हैं।
विजय पाल का कहना है कि अभी यह कहा नहीं जा सकता है कि आमजन को शिकार बनाने वाले सभी बंदर पिंजरे में कैद हो चुके हैं। इसलिय टीम अभी एक-दो दिन और शहर में ही डेरा डालकर बाकी बंदरों की धरपकड़ करेंगी। बाद में सभी बंदरों को अच्छे वातावरण में जंगल में छोड़ेगी। उधर, नगर परिषद आयुक्त का कहना है कि आमजन को इन बंदरों के उत्पात से निजात दिलाने के लिए टीम काम कर रही है। एक-दो दिन में पूरी तरह से आमजन को बंदरों के उत्पात से मुक्ति दिला दी जायेगी। इसबीच, एक और व्यक्ति पर बंदरों के हमले की चर्चा है। ऐसे में यह जाहिर है कि अभी इन बंदरों का उत्पात पूरी तरह खत्म नहीं हो पाया है।
