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अगर वोटों की जरूरत नहीं होती तो क्या

अगर वोटों की जरूरत नहीं होती तो क्या

 

देखो जी, चुनाव के वक्त नेता के लिए जनता सचमुच माई-बाप होती है। हालांकि कई बार उसकी स्थिति उस गधे टाइप की भी होती है, जिसे जरूरत के वक्त बाप बनाना पड़ता है। अब आप ही देखो कि अगर वोटों की जरूरत नहीं होती तो क्या वह तेल-फुलेल में गर्क नेता, उस व्यक्ति से हाथ मिला रहा होता, जो अभी-अभी अपनी भैंस का गोबर उठाकर आ रहा है। अगर वोटों की जरूरत नहीं होती तो क्या वह उस किसान से गले मिल रहा होता, जो अभी-अभी खेत से खटकर आया है और जिसका पसीना अभी भी नहीं सूखा है। वह उस महिला के पांवों में गिर कर आशीर्वाद नहीं ले रहा होता, जिसके हाथ गृहस्थी के काम निपटाते-निपटाते कटीले हो चुके हैं। वह उन मजदूरों के सामने हाथ नहीं जोड़ रहा होता, जिन्हें वह किसी लायक नहीं मानता है। वह उन युवाओं से हंस-हंसकर नहीं मिल रहा होता, जिन्होंने नौकरी मांग-मांगकर उसकी जान आफत कर रखी है। वह अपनी जनता माई-बाप के सामने उस बिगड़ैल बच्चे की तरह नहीं आता जो बड़े ही शातिराना ढंग से अपने गुनाहों की माफी मांग रहा होता है। वह उस ठस बच्चे की तरह भी अपने माई-बाप के सामने नहीं आता जिसका रिपोर्ट कार्ड देखते ही उसे कूटने का मन करता है, लेकिन जो अब तरह-तरह के बहाने बनाकर बचने की कोशिश्ा कर रहा है।

अगर जनता माई-बाप नहीं होती तो वह शरारती बच्चे की तरह अपने विरोधियों की शिकायत न कर रहा होता। असल में तो वह अपने माई-बाप से ही अपने विरोधियों को पिटवाना चाहता है क्योंकि खुद उसके वे काबू नहीं आ रहे हैं। वरना तो जो नेता कल तक दहाड़ रहा था, अपने विरोधियों को ललकार रहा था, उन्हें चुनौती दे रहा था, उनका उपहास कर रहा था और उन्हें च्यूंटी बराबर मानकर चल रहा था कि इन्हें तो मैं जब चाहूंगा मसलकर रख दूंगा, वही नेता चुनाव के वक्त जनता माई-बाप के समक्ष इतना दीन हीन होकर क्यों पंहुचता कि देखो माई-बाप, यह मुझे कितना छोटा बता रहा है, गिरा हुआ और नीच बता रहा है। वास्तव में माई बाप वह मुझे छोटा नहीं बता रहा, वह मुझे गिरा हुआ और नीच नहीं बता रहा है, वह आपको छोटा, गिरा हुआ और नीच बता रहा है। मैं क्या हूं बताओ, मैं तो आप ही का बच्चा हूं, मेरी आप से अलग क्या पहचान है। इसलिए हे जनता माई-बाप यह जो मुझे गाली दे रहा है और मेरे बहाने आपको गाली दे रहा है, उसे आप अच्छा सबक सिखाओ, जो मुझे मेरी औकात दिखा रहा है उसे आप उसकी औकात दिखा दो। लेकिन अब जनता भी उसकी चालाकियों को समझने लगी है और उसके रुदन पर हंस रही है।