ईरान को राहत बरकरार, इस देश की बढ़ीं मुश्किलें; समझौते से बाहर होने के बाद बढ़ा संकट

वॉशिंगटन |अमेरिका और ईरान के बीच हुए संघर्षविराम को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कहा है कि इस समझौते में लेबनान को शामिल नहीं किया गया है। इस बयान के बाद मध्य पूर्व की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और खासकर हिज्बुल्ला के लिए मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं, जबकि ईरान को कुछ राहत मिलती नजर आ रही है।
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच जो बातचीत हुई है, उसमें सिर्फ कुछ तय बिंदुओं पर सहमति बनी है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई लोग गलत जानकारी फैला रहे हैं और फर्जी दावे कर रहे हैं। ट्रंप के मुताबिक, असली बातचीत बंद कमरे में हो रही है और वही समझौते का आधार है।
क्या लेबनान को समझौते से बाहर रखा गया है?
ट्रंप ने साफ किया कि लेबनान और वहां चल रहा हिज्बुल्ला से जुड़ा संघर्ष इस सीजफायर का हिस्सा नहीं है। इसका मतलब है कि इस्राइल और हिज्बुल्ला के बीच तनाव पर इस समझौते का कोई असर नहीं पड़ेगा। इससे लेबनान में संघर्ष जारी रहने की आशंका बनी हुई है।
क्या ट्रंप ने फर्जी दावों पर सवाल उठाए?
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि कुछ लोग ऐसे समझौतों और दस्तावेजों की बात कर रहे हैं जिनका अमेरिका-ईरान वार्ता से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने ऐसे लोगों को धोखेबाज और भ्रामक बताया। ट्रंप ने कहा कि सिर्फ वही बिंदु मान्य हैं जो अमेरिका ने तय किए हैं।
क्या ईरान को इस समझौते से राहत मिली है?
इस संघर्षविराम के चलते ईरान पर तत्काल दबाव कुछ कम हुआ है। दो हफ्ते की शांति अवधि में ईरान को अपने रणनीतिक कदम तय करने का समय मिला है। हालांकि, इस दौरान भी कई शर्तें लागू हैं और आगे की बातचीत पर सब कुछ निर्भर करेगा।
क्या इस्राइल-हिज्बुल्ला संघर्ष जारी रहेगा?
चूंकि लेबनान को समझौते में शामिल नहीं किया गया है, इसलिए इस्राइल और हिज्बुल्ला के बीच टकराव जारी रह सकता है। इससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बनी रह सकती है और हालात और बिगड़ने की आशंका भी बनी हुई है।
क्या आगे की वार्ता से स्थिति बदल सकती है?
ट्रंप ने संकेत दिया है कि आगे की बातचीत में और बिंदुओं पर चर्चा होगी। अगर दोनों पक्ष सहमत होते हैं, तो समझौते का दायरा बढ़ सकता है। फिलहाल स्थिति संवेदनशील बनी हुई है और दुनिया की नजरें अगली वार्ता पर टिकी हैं।
