नगर विकास न्यास की लॉटरी में बड़ी चूक, पहले से आवंटित भूखंड दोबारा लॉटरी में शामिल, हड़कंप
भीलवाड़ा। नगर विकास न्यास में विभागीय लापरवाही और अनदेखी के चलते एक बार फिर गंभीर चूक सामने आई है। भूखंड आवंटन लॉटरी योजना में पहले से आवंटित 90 से अधिक भूखंडों को दोबारा लॉटरी प्रक्रिया में शामिल कर दिया गया। इस गलती का खुलासा होते ही न्यास कार्यालय में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित भूखंडों को लॉटरी से हटाकर अन्य भूखंडों को शामिल किया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, नगर विकास न्यास द्वारा आठ आवासीय कॉलोनियों में कुल 3081 भूखंडों की आवंटन लॉटरी निकाली जा रही है। इस प्रक्रिया में लापरवाही बरतते हुए ऐसे भूखंडों को भी शामिल कर लिया गया जो पहले ही आवंटित हो चुके थे। इससे लॉटरी के लिए आवेदन करने वाले सैकड़ों आवेदकों को भ्रम की स्थिति का सामना करना पड़ा।
लॉटरी प्रभारी रविश श्रीवास्तव और उनकी टीम जब भूखंडों के नक्शे और रिकार्ड से मिलान कर रही थी, तब यह बड़ी चूक सामने आई। इस पर तुरन्त कार्रवाई करते हुए सचिव ललित गोयल के निर्देश पर पहले से आवंटित भूखंडों को योजना से हटाया गया और नए भूखंड चिन्हित कर लॉटरी में शामिल किए गए।
यह कोई पहली घटना नहीं है जब न्यास की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हों। सूत्रों के अनुसार, न्यास में लापरवाही के चलते कई मामले पहले से ही पुलिस थानों में लंबित हैं। इनमें राजसमंद नगर परिषद के आयुक्त के फर्जी हस्ताक्षर से डेढ़ करोड़ का ठेका लेने, और एक फर्म को 27 लाख रुपये का गलत भुगतान करने के प्रकरण शामिल हैं।
न्यास सचिव ललित गोयल ने कहा कि लॉटरी में शामिल भूखंडों की दोबारा जांच कर पहले से आवंटित भूखंडों को हटा दिया गया है। उनकी प्राथमिकता है कि नवरात्र के दौरान भूखंड आवंटन प्रक्रिया को बिना किसी और चूक के संपन्न कराया जाए।
इस मामले ने एक बार फिर नगर विकास न्यास की पारदर्शिता और कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय जनता और आवेदकों ने भी मांग की है कि इस तरह की लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की जाए, जिससे भविष्य में ऐसी गलती दोबारा न हो।
