निर्यातकों के लिए आपातकालीन प्रोत्साहन कोष की मांग

By :  vijay
Update: 2025-08-01 13:14 GMT
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दिल्ली/एनसीआर– एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर हैंडीक्राफ्ट्स (ईपीसीएच) ने अमेरिका द्वारा 7 अगस्त, 2025 से भारतीय वस्तुओं, जिनमें हस्तशिल्प भी शामिल हैं, 25% शुल्क और अतिरिक्त जुर्माने लगाने पर विचार किए जाने को लेकर चिंता व्यक्त की है। चूँकि अमेरिका भारतीय हस्तशिल्प के लिए सबसे बड़ा निर्यात बाजार है, यह नीति निर्यातकों और 35 लाख से अधिक कारीगरों, विशेष रूप से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों की महिला कारीगरों की आजीविका पर बड़ा असर होगा I

वर्तमान स्थिति पर बोलते हुए, ईपीसीएच के अध्यक्ष डॉ. नीरज खन्ना ने कहा, "अमेरिका द्वारा टैरिफ लागू ने भारतीय हस्तशिल्प निर्यातकों के लिए अभूतपूर्व चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं, जो न केवल व्यापार मात्रा को प्रभावित कर रही हैं बल्कि लाखों कारीगरों की आजीविका को भी खतरे में दिया हैं। इस टैरिफ के कारण निर्यात में 15–20% तक की गिरावट आ सकती है, जिसके चलते ऑर्डरों की रद्दीकरण और निर्यातकों, विशेष रूप से छोटे और मंझोले उद्यमों के लिए कार्यशील पूंजी संकट का खतरा बढ़ गया है, जो इस उद्योग की रीढ़ हैं। ” उन्होंने आगे कहा, “अमेरिका भारत के हस्तशिल्प का सबसे बड़ा बाजार है, जिसने वित्तीय वर्ष 2024–25 में 1.57 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निर्यात किया, जो इस क्षेत्र के कुल वैश्विक निर्यात का लगभग 40% है। यह अचानक टैरिफ वृद्धि क्षेत्र की स्थिरता के लिए तात्कालिक खतरा उत्पन्न करती है।”

इसी तरह की भावनाओं को दोहराते हुए, ईपीसीएच के महानिदेशक की भूमिका में मुख्य संरक्षक और आईईएमएल के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार ने कहा, "तत्काल कार्रवाई आवश्यक है और ईपीसीएच सरकार के साथ मिलकर वित्तीय और गैर-वित्तीय हस्तक्षेप सुनिश्चित करने हेतु कार्य कर रहा है, जिससे हमारा उद्योग वैश्विक व्यापार में हुए बदलावों का बोझ न उठाए। इसमें ‘मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट्स फ्रॉम इंडिया स्कीम’ (एमईआईएस) को बढ़े हुए रेट्स के साथ फिर से लागू करना; इंटरेस्ट इक्वलाइजेशन स्कीम के लाभ बढ़ाना; हस्तशिल्प वस्तुओं पर आरओडीटीईपी और ड्यूटी ड्राबैक रेट्स में वृद्धि; प्रभावित निर्यातकों के लिए आपातकालीन प्रोत्साहन कोष की स्थापना, अमेरिका जाने वाले शिपमेंट्स के लिए सब्सिडी युक्त मालभाड़ा, और एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन स्कीम के तहत प्रचार योजनाओं को शीघ्र शुरू करना शामिल हैं।” उन्होंने आगे कहा, “काउंसिल ने गैर-वित्तीय उपायों पर भी जोर दिया है—जैसे अमेरिका के साथ हैंडीक्राफ्ट्स को छूट दिलाने की दिशा में द्विपक्षीय वार्ताओं में तेजी, निर्यात प्रक्रियाओं का सरलीकरण और जर्मनी, यूके, जापान, फ्रांस, सऊदी अरब, स्पेन और मध्य-पूर्व जैसे वैकल्पिक बाजारों में लक्षित प्रचार।”

ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक   आर. के. वर्मा ने कहा, "यह संकट बाज़ारों में विविधता लाने, उत्पादों में नवाचार लाने और भारतीय हस्तशिल्प के लिए एक मज़बूत वैश्विक ब्रांड बनाने जैसी हमारी रणनीतियों पर पुनर्विचार करने का अवसर भी प्रस्तुत करता है। अब कार्रवाई करने का समय आ गया है और ईपीसीएच इस बदलाव का नेतृत्व करने के लिए प्रतिबद्ध है। परिषद ने इस क्षेत्र की लचीलापन बढ़ाने के लिए दीर्घकालिक संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता पर ज़ोर दिया है। इनमें डिज़ाइन-आधारित ब्रांडिंग में निवेश, उत्पाद विविधीकरण और भारतीय हस्तशिल्प को वैश्विक हस्तशिल्प, विलासिता और टिकाऊ उत्पाद क्षेत्रों में स्थापित करना शामिल है।"

हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद देश से हस्तशिल्प के निर्यात को बढ़ावा देने और देश के विभिन्न शिल्प समूहों में घरेलू, जीवनशैली, वस्त्र, फर्नीचर और फैशन आभूषण एवं सहायक उत्पादों के उत्पादन में लगे लाखों शिल्पकारों के प्रतिभाशाली हाथों के जादू की ब्रांड छवि बनाने के लिए एक नोडल संस्थान है। ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक   आर. के. वर्मा ने बताया कि वर्ष 2024-25 के दौरान कुल हस्तशिल्प निर्यात 33,123 करोड़ रुपये (3,918 मिलियन अमेरिकी डॉलर) रहा और वर्ष 2024-25 के दौरान अमेरिका को हस्तशिल्प निर्यात 12,814.73 करोड़ रुपये (1,518.18 मिलियन अमेरिकी डॉलर) रहा I

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