रूसी तेल आयात में भारी गिरावट: 38 महीने के निचले स्तर पर पहुंची सप्लाई, जानें क्या है बड़ी वजह
नई दिल्ली | वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 में भारत ने रूस से 2.7 अरब डॉलर का कच्चा तेल आयात किया, जो फरवरी 2024 के बाद किसी भी महीने में सबसे कम है। यह नवंबर 2025 के 3.7 अरब डॉलर के आयात से करीब 27% कम और दिसंबर 2024 के 3.2 अरब डॉलर की तुलना में 15% से अधिक की गिरावट है।
अमेरिका ने रूसी तेल कंपनियों पर लगाया प्रतिबंध
यह गिरावट ऐसे समय आई है, जब अमेरिका ने 22 अक्तूबर को रूसी तेल क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों रोसनेफ्ट और लुकोइल पर प्रतिबंधों की घोषणा की थी। अमेरिका ने इन कंपनियों से जुड़े सभी लेन-देन 21 नवंबर तक समाप्त करने की समय-सीमा तय की थी। ये दोनों कंपनियां भारत को रूसी तेल निर्यात की प्रमुख आपूर्तिकर्ता रही हैं।
सूत्रों के मुताबिक, तेल विपणन कंपनियों और निजी रिफाइनरों से इस विषय पर संपर्क किया गया। रिलायंस इंडस्ट्रीजऔर पेट्रोलियम क्षेत्र की कुछ कंपनियों ने प्रतिक्रिया दी, जबकि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम से कोई जवाब नहीं मिला।
गिरावट के बावजूद भी रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता
इसके बावजूद, रूस 2025-26 में भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। दिसंबर 2025 में भारत के कुल 11.4 अरब डॉलर के तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी 24% रही। अन्य प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में इराक (2.4 अरब डॉलर), सऊदी अरब (1.8 अरब डॉलर), यूएई (1.7 अरब डॉलर) और अमेरिका (0.6 अरब डॉलर) शामिल रहे।
वित्त वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीनों (अप्रैल-दिसंबर) में भारत ने 34 देशों से कुल 105.1 अरब डॉलर का कच्चा तेल आयात किया। इस अवधि में रूस 33.1 अरब डॉलर के साथ सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता रहा, जिसकी हिस्सेदारी 31.5% रही। इसके मुकाबले, पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में कुल 109.3 अरब डॉलर के आयात में रूस की हिस्सेदारी 39.9 अरब डॉलर या 36.5% थी।
अमेरिका से कच्चे तेल का आयात बढ़ा
इसी दौरान अमेरिका से आयात बढ़ा है। दिसंबर 2025 में अमेरिका से 0.6 अरब डॉलर का कच्चा तेल आया, जो एक साल पहले 0.4 अरब डॉलर था। अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच अमेरिका ने भारत को 8.2 अरब डॉलर का तेल निर्यात किया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के 5 अरब डॉलर से 7.8% अधिक है।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की घोषणा करते हुए पिछले सप्ताह अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि भारत रूसी तेल आयात को शून्य करने पर सहमत हुआ है। हालांकि, नरेंद्र मोदी सरकार ने इस दावे पर सीधे प्रतिक्रिया नहीं दी और कहा कि 1.4 अरब भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
