छह साल से छोटे बच्चे नहीं मिलेंगे ‘फॉस्टर केयर’ में जगह, केंद्र सरकार का बड़ा स्पष्टीकरण
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि छह वर्ष से कम आयु के बच्चों को ‘फॉस्टर केयर’ (अस्थायी देखभाल व्यवस्था) के तहत नहीं रखा जाएगा। यह कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि नए नियमों की अलग-अलग व्याख्याओं से राज्यों और एजेंसियों में भ्रम की स्थिति बन गई थी।
क्या है फॉस्टर केयर?
यह ऐसी व्यवस्था है जिसमें उन बच्चों को अस्थायी रूप से किसी अन्य परिवार में रखा जाता है, जिनके माता-पिता किसी वजह से देखभाल करने में सक्षम नहीं होते। लेकिन ये बच्चे कानूनी रूप से गोद लेने के लिए उपलब्ध घोषित नहीं होते। पूरी प्रक्रिया सरकार या मान्यता प्राप्त सामाजिक संस्था की निगरानी में होती है।
सीएआरए का आदेश
केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) ने हाल ही में एक कार्यालय ज्ञापन जारी कर किशोर न्याय नियमावली के नियम 23(3) और आदर्श पालक देखभाल दिशा-निर्देश 4(1) का हवाला दिया। इसमें कहा गया है कि—
➡️ केवल 6 वर्ष या उससे अधिक आयु के बच्चे ही पालक देखभाल (फॉस्टर केयर) में रखे जाने के पात्र होंगे।
➡️ सभी राज्य दत्तक ग्रहण संसाधन एजेंसियों (SARA), जिला बाल संरक्षण इकाइयों (DCPU) और विशिष्ट दत्तक ग्रहण एजेंसियों (SAA) को यह निर्देश भेजा गया है।
बच्चों की देखभाल का बदलता ट्रेंड
आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि गैर-संस्थागत देखभाल (जैसे पालक देखभाल, रिश्तेदारों के पास देखभाल आदि) में बच्चों की संख्या पिछले तीन साल में तेजी से बढ़ी है।
वर्ष 2021-22 → 29,331 बच्चे
वर्ष 2022-23 → 62,675 बच्चे
वर्ष 2023-24 → 1,21,861 बच्चे
यानी तीन साल में यह संख्या लगभग चार गुना बढ़ गई।
