होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका का बड़ा सैन्य ऑपरेशन: समुद्री सुरंगों को हटाने का काम शुरू, वैश्विक तेल आपूर्ति मार्ग पर सुरक्षा कड़ी

Update: 2026-04-11 18:09 GMT


वाशिंगटन/दुबई। पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव के बीच अमेरिकी नौसेना ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) में एक व्यापक सैन्य ऑपरेशन शुरू कर दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की है कि समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों (माइंस) को नष्ट करने के लिए माइन क्लियरेंस मिशन की शुरुआत की गई है।

यूएस नेवी के दो युद्धपोत मिशन पर तैनात

सेंटकॉम के अनुसार, 11 अप्रैल को अमेरिकी नौसेना के दो शक्तिशाली गाइडेड-मिसाइल डेस्ट्रॉयर यूएसएस फ्रैंक ई. पीटरसन (DDG 121) और यूएसएस माइकल मर्फी (DDG 112) ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरते हुए अरब सागर क्षेत्र में ऑपरेशन को अंजाम दिया। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य समुद्री रास्ते को पूरी तरह सुरक्षित बनाना है ताकि व्यापारिक जहाजों की आवाजाही में कोई बाधा न आए।

ईरान पर माइंस बिछाने का आरोप

अमेरिकी कमांड ने दावा किया है कि ये समुद्री माइंस ईरान के 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स' (IRGC) द्वारा बिछाई गई थीं। हालांकि, ईरान की ओर से अभी तक इस दावे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। सेंटकॉम कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा कि अमेरिकी बल एक नया और सुरक्षित समुद्री मार्ग तैयार कर रहे हैं, जिसकी जानकारी जल्द ही अंतरराष्ट्रीय समुद्री उद्योग के साथ साझा की जाएगी।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है असर

होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक कच्चे तेल के व्यापार के लिए जीवन रेखा माना जाता है। दुनिया के कुल तेल निर्यात का लगभग पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। इस क्षेत्र में किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि या माइंस का खतरा सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों को प्रभावित करता है। एडमिरल कूपर ने बताया कि आने वाले दिनों में मिशन को तेज करने के लिए अतिरिक्त बलों और उन्नत अंडरवॉटर ड्रोन्स की मदद ली जाएगी।

अमेरिका का यह कदम ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में शांति वार्ता के प्रयास भी चल रहे हैं, लेकिन इस सैन्य हलचल ने एक बार फिर संघर्ष की आशंकाओं को जन्म दे दिया है।

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