3 साल की मासूम से दरिंदगी के दोषी को फांसी की सजा; कोर्ट ने कहा- 'माफी की गुंजाइश नहीं'

Update: 2026-01-15 17:47 GMT


​शहडोल। जिले में तीन वर्ष की मासूम बालिका के साथ हुई रूह कंपा देने वाली दरिंदगी के मामले में विशेष न्यायालय (POCSO) ने अपना कड़ा फैसला सुना दिया है। न्यायाधीश सुशील कुमार अग्रवाल ने मुख्य आरोपित भानू उर्फ रामनारायण ढीमर को दोषी करार देते हुए मृत्युदंड (फांसी) की सजा सुनाई है।

​अदालत की सख्त टिप्पणी

​फैसला सुनाते समय न्यायाधीश भावुक और सख्त नजर आए। उन्होंने अपनी टिप्पणी में कहा कि— "तीन वर्ष की वह अबोध बालिका जो ठीक से बोल भी नहीं सकती थी, उसने कितना दर्द सहा होगा, इसकी कल्पना मात्र से रूह कांप जाती है। ऐसे दुर्लभतम मामले में अपराधी के लिए माफी की कोई गुंजाइश नहीं है।"

​वारदात और घटनाक्रम

​तारीख: यह जघन्य वारदात 1 मार्च 2023 को हुई थी, जब आरोपित ने शराब के नशे में मासूम को अपनी हवस का शिकार बनाया।

​मौत: दरिंदगी के कारण बच्ची घर में बेहोश मिली थी। सात दिनों तक जिंदगी की जंग लड़ने के बाद 7 मार्च 2023 को मेडिकल कॉलेज में उसने दम तोड़ दिया था।

​धमकी: वारदात के बाद मुख्य आरोपित, उसकी पत्नी पिंकी और सहयोगी राजकुमार ने पीड़ित परिवार को पुलिस के पास जाने पर गोली मारने की धमकी भी दी थी।

​सह-आरोपियों को भी सजा

​न्यायालय ने मुख्य आरोपित का साथ देने और साक्ष्य छिपाने के अपराध में उसकी पत्नी पिंकी ढीमर और राजकुमार बर्मन को भी 4-4 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। वहीं, राज्य सरकार को पीड़िता के माता-पिता को 4 लाख रुपये का मुआवजा देने के आदेश दिए गए हैं। मामले के एक अन्य आरोपी राधेश्याम को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।

​यह फैसला समाज में एक कड़ा संदेश देता है कि मासूमों के साथ हैवानियत करने वालों के लिए कानून में केवल और केवल मौत की सजा है।

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