देवउठनी एकादशी पर पंचकोशी परिक्रमा में उमड़ी भक्तों की भीड़, चारों ओर गूंजे जयकारे

By :  vijay
Update: 2025-11-01 08:09 GMT

अयोध्या । देश के कई राज्यों में शनिवार को देवउठनी एकादशी मनाई जा रही है। प्रयागराज में श्रद्धालु पूरी श्रद्धा के साथ तुलसी-शालिग्राम भगवान का विवाह करा रहे हैं, वहीं, अयोध्या में पवित्र पंचकोशी परिक्रमा में श्रद्धालु लाखों की संख्या में परिक्रमा कर रहे हैं। भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन भी अलर्ट मोड पर है। पवित्र पंचकोशी परिक्रमा 1 नवंबर से लेकर 2 नवंबर तक चलेगी। कार्तिक मास में पड़ने वाली देवउठनी एकादशी के दिन स्नान और परिक्रमा का बहुत महत्व है। दूर-दूर से श्रद्धालु भगवान राम और भगवान विष्णु के नामों का जाप करते हुए परिक्रमा लगा रहे हैं। परिक्रमा करने पहुंचे श्रद्धालुओं ने आईएएनएस से खास बातचीत में कहा, "किसी व्यक्ति की ईश्वर में आस्था और उसके पिछले कर्म यह निर्धारित करते हैं कि वह परिक्रमा कैसे करेगा। यह मेरा तीसरा वर्ष है, जबकि कुछ लोगों के लिए यह पांचवा या छठा साल है। प्रशासन में व्यवस्था अच्छी हैं, लेकिन इस बार भीड़ बहुत ज्यादा है।"

भक्तों को नंगे पांव अयोध्या की परिक्रमा करते हुए देखा गया।

बढ़ती भीड़ और व्यवस्था पर बात करते हुए आईजी प्रवीण कुमार ने आईएएनएस से कहा, "पावन कार्तिक एकादशी पर पंचकोसी परिक्रमा बड़े उत्साह के साथ शुरू हो गई है और घाटों व परिक्रमा के रास्तों पर व्यवस्थाएं की गई हैं। सुरक्षा की दृष्टि से परिक्रमा मार्गों को जोन के हिसाब से विभाजित कर ड्रोन से निगरानी रखी जा रही है और जगह-जगह पुलिस प्रशासन तैनात है।"

बता दें कि कार्तिक मास में पड़ने वाली देवउठनी एकादशी पर अयोध्या में परिक्रमा का महत्व बहुत ज्यादा है। माना जाता है कि आज के दिन परिक्रमा करने से सारे पापों का नाश होता है और भगवान राम की असीम कृपा मिलती है। एकादशी के दिन तीन तरह की परिक्रमा होती हैं, जिनमें 5 कोसी, 14 कोसी और 84 कोसी की परिक्रमा होती है। भक्त अपनी सामर्थ्यानुसार परिक्रमा करते हैं। मान्यता है कि परिक्रमा मार्ग उन जगहों से होकर गुजरता है, जहां भगवान राम ने अपनी बाल्यावस्था बिताई थी।

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