डोनाल्ड ट्रंप का भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ 'आर्थिक ब्लैकमेल' : राहुल गांधी

नई दिल्ली : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाया है. उनके इस ऐलान के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर हमला बोला है. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर कुल 50 प्रतिशत का शुल्क लगाए जाने की घोषणा के बाद बुधवार को कहा कि यह "आर्थिक ब्लैकमेल" है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अपनी "कमजोरी" भारतीय हितों पर हावी नहीं होने देना चाहिए.
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, "ट्रंप का 50 प्रतिशत टैरिफ आर्थिक ब्लैकमेल है। अनुचित व्यापार समझौते के लिए भारत को धमकाने का एक प्रयास है." उन्होंने कहा कि बेहतर होगा कि प्रधानमंत्री मोदी अपनी कमजोरी को भारतीयों के हितों पर हावी न होने दें
एकदम से रिश्तों में इतनी कड़वाहट कैसे आ गई? - सुप्रिया श्रीनेत्र
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने भी एक पोस्ट में इसे लेकर हमला बोला है. उन्होंने कहा, एक वो टोली है ना जो मोदी जी के अमेरिका पहुंचने पर एयरपोर्ट आकर नारेबाजी करती है . उनके दर्शन करके धन्य हो जाते हैं. उनके छू देने मात्र से तर जाते हैं. अमृतकाल की बात करते करते अश्रुधारा थमती नहीं. खुद भारतीय नागरिकता त्याग कर कैमरे पर भारत माता की जय के नारे लगाते हैं. वो लोग गायब हैं- ट्रंप के हिंदुस्तान विरोधी बातों और निर्णयों पर बिल्कुल चुप हैं.
इसी पोस्ट में सवाल उठाते हुए सुप्रिया ने आगे लिखा, इतना सन्नाटा क्यों है भाई? कुछ बोलोगे नहीं देश के लिए? खड़े नहीं होगे देश के अपमान के खिलाफ? खून है या पानी? या फिर आका की तरह तुम सब भी डरते हो? सारी राष्ट्रभक्ति बस कैमरे तक ही सीमित है? ऐसे लोगों को मोदी जी के समर्थन में अपनी विदेशी नागरिकता त्याग कर तुरंत भारत आना चाहिए.
श्रीनेत ने कहा, इतिहास में पहली बार भारत के प्रधानमंत्री ने किसी अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में प्रचार किया, नमस्ते ट्रम्प, हाउडी मोदी सब हुआ. मीडिया केमिस्ट्री की बात करता था. एकदम से रिश्तों में इतनी कड़वाहट कैसे आ गई? नुकसान देश क्यों झेले? रूस के सस्ते तेल का फ़ायदा लोगों को क्यों नहीं?
पीएम मोदी ने परंपराओं को दरकिनार करते हुए घोषणा की थी-जयराम रमेश
उधर, कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एक लंबा-चौड़ा पोस्ट करके इस मामले में सरकार को घेरा है. उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री मोदी सितंबर 2019 में अमेरिका गए और ह्यूस्टन में हाउडी मोदी कार्यक्रम में शामिल हुए. इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति ट्रंप भी मौजूद थे. पीएम मोदी ने सभी परंपराओं को दरकिनार करते हुए खुले मंच से घोषणा की- अबकी बार, ट्रंप सरकार! फरवरी 2020 में प्रधानमंत्री मोदी ने अहमदाबाद में राष्ट्रपति ट्रंप के सम्मान में भव्य नमस्ते ट्रंप कार्यक्रम की मेजबानी की.
उन्होंने कहा, फरवरी 2025 में इस बात को काफी प्रचारित किया गया कि राष्ट्रपति ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में प्रधानमंत्री मोदी उन शुरुआती राष्ट्राध्यक्षों में शामिल रहे जो उनसे मिलने पहुंचे. इससे पहले इस बात पर भी खूब चर्चा हुई थी कि राष्ट्रपति ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह में विदेश मंत्री को पहली पंक्ति में जगह मिली थी और डॉ. जयशंकर विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मिलने वाले पहले नेता थे.
'बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे देशों पर टैरिफ हमसे कम'- शशि थरूर
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि यह हमारे लिए कोई अच्छी खबर नहीं है. उन्होंने कहा कि अगर हमारा कुल टैरिफ 50 फीसदी हो जाता है तो अमेरिका में बहुत से लोगों के लिए हमारे उत्पाद पहुंच से दूर हो जाएंगे.
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा, "अगर नजर डालें तो वियतनाम, इंडोनेशिया, फिलीपींस, यहां तक कि बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे देशों पर टैरिफ हमसे कम है. मुझे डर है कि जब अमेरिका के लोगों को कहीं और सस्ता सामान मिलेगा तो वे हमारे समान नहीं खरीदेंगे. यह हमारे निर्यात के लिए बहुत अच्छा नहीं है. इसका मतलब है कि हमें उन देशों और बाजारों में गंभीरता से विविधता लाने की जरूरत है जो हमारी पेशकश में रुचि रखते हों."
कांग्रेस सांसद ने कहा, "अब हमारा ब्रिटेन के साथ एक मुक्त व्यापार समझौता (FTA) है. हम यूरोपीय संघ से बात कर रहे हैं. ऐसे कई देश हैं जहां हम उम्मीद करते हैं. यह निश्चित रूप से एक झटका है."
प्रियंका चतुर्वेदी ने व्यापार मंत्री मांगा जवाब
अमेरिका के द्वारा भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफल लगाए जाने की घोषणा पर शिवसेना यूबीटी सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा,"पहले के 25 प्रतिशत से 25 फीसदी अतिरिक्त. क्या भारत अब दुनिया का सबसे ज्यादा टैरिफ वाला देश है शायद भारत के व्यापार मंत्री हमें बताएं."
एनडीए टैरिफ बढ़ोतरी के मामले में डोनाल्ड ट्रंप को मना लेगा - शाइना एनसी
शिवसेना की राष्ट्रीय प्रवक्ता शाइना एनसी ने कहा, "भारत ने डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ बढ़ोतरी को दृढ़ता से खारिज कर दिया है.दरअसल, हम तो यहां तक कह चुके हैं कि उसकी ऊर्जा नीति संप्रभुता और आवश्यकता, दोनों का मामला है.हमारा रुख़ यही रहा है कि हम राजनयिक माध्यमों से अमेरिका के साथ बातचीत जारी रखते हुए निर्यातकों को समर्थन देने के लिए कदम उठाएंगे.. मुझे पूरा यकीन है कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में एनडीए टैरिफ बढ़ोतरी के मामले में डोनाल्ड ट्रंप को मना लेगा क्योंकि यह हमारी अपनी संप्रभुता, हमारी अपनी सुरक्षा का मामला है..."
हमारे लिए घबराने का कोई कारण नहीं -अर्थशास्त्री डॉ. मनोरंजन शर्मा
इन्फोमेरिक्स रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री डॉ. मनोरंजन शर्मा कहते हैं, "आज शाम, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 25% तक अतिरिक्त टैरिफ लगा दिए हैं, जिससे कुल टैरिफ का स्तर 50% हो गया है. इससे दवा और फार्मास्यूटिकल्स, कपड़ा, इलेक्ट्रिकल्स और इलेक्ट्रॉनिक्स, रत्न और आभूषण जैसे क्षेत्रों पर गंभीर असर पड़ेगा. इसलिए यह निश्चित रूप से भारत में हमारे लिए चिंतित होने का एक कारण है, लेकिन हमारे लिए घबराने का कोई कारण नहीं है. यह याद रखना आवश्यक है कि चीन के विपरीत, भारत काफी हद तक घरेलू स्तर पर संचालित अर्थव्यवस्था है... हमने अतीत में कई तूफानों का सामना किया है, जैसे अक्टूबर 2008 का वैश्विक वित्तीय संकट या यहां तक कि COVID-19 महामारी. इसलिए हमें विश्वास है कि इससे कुछ नुकसान होगा, लेकिन हम इस झटके को आत्मविश्वास से झेलने में सक्षम होंगे."
भारत इसका लाभ उठाकर अपने लिए एक सकारात्मक परिणाम तैयार करे - आनंद महिंद्रा
महिंद्रा समूह के अध्यक्ष एवं टीम सदस्य आनंद महिंद्रा ने कहा, "अमेरिका द्वारा छेड़े गए मौजूदा टैरिफ युद्ध में 'अनपेक्षित परिणामों का नियम' चुपके से काम करता दिख रहा है."
उन्होंने दो उदाहरण देते हुए कहा है कि ऐसा लग सकता है कि यूरोपीय संघ ने विकसित हो रही वैश्विक टैरिफ व्यवस्था को स्वीकार कर लिया है और अपनी रणनीतिक समायोजन प्रक्रिया के साथ प्रतिक्रिया दे रहा है. फिर भी, इस टकराव ने यूरोप को अपनी सुरक्षा निर्भरता पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित किया है, जिसके परिणामस्वरूप फ्रांस और जर्मनी में रक्षा खर्च में वृद्धि हुई है. इस प्रक्रिया में, जर्मनी ने अपनी राजकोषीय रूढ़िवादिता में नरमी बरती है, जो यूरोप की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में पुनरुत्थान को उत्प्रेरित कर सकती है. दुनिया को विकास का एक नया इंजन मिल सकता है. इसके अलावा कनाडा, जो लंबे समय से अपने प्रांतों के बीच कुख्यात आंतरिक व्यापार बाधाओं से बाधित है, अब उन्हें दूर करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं, जिससे देश एक साझा बाजार के करीब आ रहा है और आर्थिक लचीलापन बढ़ रहा है. ये दोनों 'अनपेक्षित परिणाम' वैश्विक विकास के लिए दीर्घकालिक सकारात्मक परिणाम बन सकते हैं.
महिंद्रा ने कहा, क्या भारत को भी इस अवसर का लाभ उठाकर अपने लिए एक सकारात्मक परिणाम तैयार नहीं करना चाहिए? जिस प्रकार 1991 के विदेशी मुद्रा भंडार संकट ने उदारीकरण को गति दी, क्या आज टैरिफ पर वैश्विक 'मंथन' से हमें कुछ 'अमृत' मिल सकता है?
रूसी तेल के बड़े आयातक चीन का कोई जिक्र नहीं - डॉ. ब्रह्मा चेलानी
प्रोफेसर, रणनीतिक विचारक, लेखक और टिप्पणीकार डॉ. ब्रह्मा चेलानी ने कहा, रूस से तेल ख़रीद को लेकर भारत पर निशाना साधते हुए अपने कार्यकारी आदेश में, ट्रंप ने नई दिल्ली को अपने द्वितीयक प्रतिबंधों का पहला शिकार बनाया है, और उस पर 25% अतिरिक्त टैरिफ़ लगाया है.
उन्होंने कहा, यह आदेश दो कारणों से महत्वपूर्ण है: इसमें सिर्फ रूसी तेल का जिक्र है, और यूरोपीय संघ द्वारा एलएनजी सहित रूसी प्राकृतिक गैस के बड़े पैमाने पर आयात को सुविधाजनक रूप से नजरअंदाज किया गया है, और इसमें रूसी तेल के सबसे बड़े आयातक - चीन का कोई जिक्र नहीं है.
भारत किसी के आगे नहीं झुकता- गोयनका
आरपीजी एंटरप्राइजेज के चेयरमैन हर्ष गोयनका ने कहा,आप हमारे निर्यात पर टैरिफ लगा सकते हैं, लेकिन हमारी संप्रभुता पर नहीं. अपने टैरिफ बढ़ाएं- हम अपना संकल्प बढ़ाएंगे, बेहतर विकल्प ढूंढेंगे और आत्मनिर्भरता का निर्माण करेंगे. भारत किसी के आगे नहीं झुकता.


