हरतालिका तीज: सिर्फ शिव-पार्वती नहीं, इन देवताओं की पूजा भी है ज़रूरी

By :  vijay
Update: 2025-08-19 09:13 GMT

हरतालिका तीज हिंदू परंपराओं में महिलाओं का सबसे महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और संतान की मंगलकामना के लिए निर्जला व्रत रखती हैं और माता पार्वती व भगवान शिव की पूजा करती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस अवसर पर सिर्फ शिव-पार्वती ही नहीं, बल्कि अन्य देवी-देवताओं की आराधना भी उतनी ही जरूरी मानी जाती है?

🔸 गणेश पूजा से होती है शुरुआत

हरतालिका तीज की पूजा भगवान गणेश के बिना अधूरी मानी जाती है। गणेशजी को विघ्नहर्ता कहा गया है, इसलिए सबसे पहले महिलाएं गणेशजी का पूजन करके व्रत और अनुष्ठान की शुरुआत करती हैं।

🔸 सूर्य देव को अर्घ्य का महत्व

तीज पर सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देना बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि सूर्य की कृपा से जीवन में ऊर्जा, स्वास्थ्य और सकारात्मकता बनी रहती है।

🔸 शुक्र देव की आराधना से बढ़ता प्रेम

व्रत के दौरान शुक्र देव की पूजा भी खास मानी जाती है। शास्त्रों के अनुसार, शुक्र देवता का आशीर्वाद पति-पत्नी के बीच प्रेम, सामंजस्य और खुशहाली बनाए रखने में मदद करता है।

अर्थात, हरतालिका तीज केवल एक व्रत नहीं बल्कि आस्था, प्रेम और समर्पण का उत्सव है, जिसमें शिव-पार्वती के साथ अन्य देवताओं की उपासना भी उतनी ही लाभकारी मानी गई है।

हरतालिका तीज पर महिलाएं पूजा में नारियल, फूल और विभिन्न प्रकार के फल अर्पित करती हैं. इससे न केवल पूजा सुचारू होती है, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह भी घर में बढ़ता है. साथ ही, देवी-देवताओं की सही विधि से पूजा और मंत्र जाप करने से व्रती को आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है और घर में शांति और सुख बना रहता है.

शिव-पार्वती के व्रत तक सीमित नहीं है हरतालिका तीज

इस प्रकार, हरतालिका तीज केवल शिव-पार्वती के व्रत तक सीमित नहीं है. गणेशजी, सूर्य देव और शुक्र देवता की पूजा भी करना आवश्यक है, जिससे पूरे घर में समृद्धि, सौभाग्य और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है. इस दिन का उपवास, भजन-कीर्तन और देवी-देवताओं की आराधना न केवल व्यक्तिगत जीवन में लाभकारी होती है, बल्कि पूरे परिवार को उनके आशीर्वाद की प्राप्ति भी होती है.

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