जहाँ न चढ़ावा चढ़ता है, न प्रसाद; फिर भी पूरी होती हैं हर मुराद, ऐसा हे बाबा धाम
भीलवाड़ा। विजय गढ़वाल/अंकुर सनाढ्य। कलयुग के इस दौûर में जहाँ धर्म के नाम पर बड़े-बड़े चढ़ावे और व्यापार की चर्चा होती है, वहीं राजस्थान के वस्त्र नगरी भीलवाड़ा में एक ऐसा मंदिर है जो अपनी निस्वार्थ सेवा और अनूठी परंपराओं के लिए पूरे देश में मिसाल बना हुआ है। भीलवाड़ा शहर के रेलवे पटरी पार स्थित 'श्री बाबा धाम' एक ऐसा आध्यात्मिक केंद्र है, जहाँ भक्ति का मोल पैसों से नहीं, बल्कि सच्चे मन की अरदास से लगाया जाता है। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ न तो कोई चढ़ावा स्वीकार किया जाता है और न ही किसी प्रकार का प्रसाद बेचा जाता है।
18 वर्षों से प्रज्वलित है माता वैष्णो देवी की अखंड ज्योत
श्री बाबा धाम की महिमा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहाँ पिछले 18 वर्षों से माता वैष्णो देवी की अखंड ज्योति प्रज्वलित है। मंदिर के महंत विनीत अग्रवाल ने 'भीलवाड़ा हलचल' से विशेष बातचीत में बताया कि 18 साल पहले मंदिर की स्थापना के समय पावन धाम कटरा (वैष्णो देवी) से यह ज्योत लाई गई थी। तब से लेकर आज तक, बिना एक पल रुके, यह दिव्य लौ भक्तों के जीवन के अंधकार को मिटा रही है।
शेर पर सवार नहीं, बल्कि 'खड़ी प्रतिमा' देती है विशेष संदेश
आमतौर पर हम देखते हैं कि माता दुर्गा या वैष्णो देवी की प्रतिमा शेर पर विराजित होती है, लेकिन श्री बाबा धाम में माता का स्वरूप अत्यंत निराला और दुर्लभ है। यहाँ माता की खड़ी प्रतिमा स्थापित है। महंत जी बताते हैं कि माता का यह स्वरूप एक विशेष संदेश देता है—"माता अपने भक्तों की पुकार सुनने के लिए सदैव तत्पर और खड़ी हैं।" यह अद्वितीय प्रतिमा यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं को सुरक्षा और ममता का अहसास कराती है।
नि:शुल्क मेहंदी और नारियल: आस्था से पूरी होती है संतान और विवाह की कामना
इस मंदिर की ख्याति केवल इसकी बनावट तक सीमित नहीं है, बल्कि यहाँ होने वाले 'चमत्कार' भक्तों को दूर-दूर से खींच लाते हैं। मंदिर में दो विशेष कामनाओं के लिए भक्त सबसे अधिक पहुँचते हैं:
* विवाह की बाधा: जिन युवक-युवतियों के विवाह में विलंब हो रहा है, उन्हें मंदिर की ओर से नि:शुल्क मेहंदी और लाछा प्रदान किया जाता है। माता के चरणों में अरदास लगाकर इस मेहंदी को लगाने मात्र से भक्तों की शादी की मुरादें पूरी हो रही हैं।
* संतान प्राप्ति: सूनी गोद भरने की कामना लेकर आने वाली महिलाओं को यहाँ नि:शुल्क नारियल भेंट किया जाता है। माता की असीम अनुकंपा से सैकड़ों परिवारों में किलकारियां गूंजी हैं, जो इस दरबार की अटूट आस्था का प्रमाण है।
बिना भेंट-पूजा के 18 साल का गौरवमयी सफर
महंत विनीत अग्रवाल बड़े गर्व से कहते हैं कि "माता के दरबार में सब बराबर हैं।" यहाँ अगरबत्ती, फूल-माला या नकद भेंट की कोई अनिवार्यता नहीं है। बिना किसी बाहरी आर्थिक स्रोत या चढ़ावे के, यह मंदिर पिछले 18 वर्षों से न केवल संचालित हो रहा है, बल्कि भव्य आयोजनों का केंद्र भी बना हुआ है। अब तक यहाँ 1000 से ज्यादा सुंदरकांड पाठ हो चुके हैं। नवरात्रि के दौरान यहाँ का नजारा देखते ही बनता है, जहाँ कन्या पूजन, गरबा, डांडिया, हवन और भजन संध्या जैसे कार्यक्रम पूरी भव्यता के साथ आयोजित किए जाते हैं।
आगामी कार्यक्रम: पाटो उत्सव और छप्पन भोग की तैयारी
श्री बाबा धाम में आगामी 29 और 30 मार्च को भव्य उत्सव की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। मयंक अग्रवाल ने बताया कि:
* 29 मार्च: में टो उत्सव के उपलक्ष्य में विशाल छप्पन भोग, भव्य भजन संध्या और महाआरती का आयोजन होगा।
* 30 मार्च: सुबह 9:15 बजे हवन-पूजन, दोपहर 12:15 बजे महाआरती और उसके पश्चात विशाल भंडारा (मां प्रसादी) का आयोजन किया जाएगा।
निष्कर्ष: भीलवाड़ा का गौरव है श्री बाबा धाम
शहर के कोलाहल से दूर, रेलवे पटरी पार स्थित यह धाम शांति और सादगी का प्रतीक है। यहाँ न वीआईपी कल्चर है, न ही पैसों का बोलबाला। यहाँ केवल भक्त है और उसकी भक्ति। यही कारण है कि आज भीलवाड़ा ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों से भी लोग अपनी झोली फैलाने यहाँ आते हैं और खुशियां लेकर लौटते हैं।
> महंत विनीत अग्रवाल का संदेश: "जो भक्त मन में सच्चा विश्वास लेकर आता है, माता उसे कभी खाली हाथ नहीं भेजती। यहाँ केवल श्रद्धा की भेंट स्वीकार्य है।"
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