नवरात्रि पंचम दिन: स्कंदमाता की उपासना से मिलेगा साहस और आत्मविश्वास, कार्तिकेय की माता का दिव्य स्वरूप है शक्ति का प्रतीक

Update: 2026-03-22 22:30 GMT

 देशभर में चैत्र नवरात्रि की धूम मची हुई है। चैत्र नवरात्रि के पांचवें दिन आज आदिशक्ति के पंचम स्वरूप माँ स्कंदमाता की विशेष पूजा-अर्चना की जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, स्कंदमाता भगवान स्कंद (कार्तिकेय) की माता हैं और उन्हें शक्ति, साहस व वात्सल्य की देवी माना जाता है।

शक्ति और साहस की अधिष्ठात्री

 माँ स्कंदमाता अपने भक्तों को वही शक्ति और साहस प्रदान करती हैं, जो उन्होंने अपने पुत्र स्कंद को तारकासुर जैसे भयानक असुरों के वध के लिए प्रदान की थी। माँ की कृपा से ही कार्तिकेय ने देवताओं की रक्षा की और युद्ध में विजय प्राप्त की।


दिव्य स्वरूप: माँ स्कंदमाता की चार भुजाएं हैं। दाईं तरफ की ऊपर वाली भुजा में उन्होंने स्कंद को गोद में पकड़ा हुआ है, जबकि नीचे वाली भुजा में कमल का पुष्प है। बाईं तरफ की ऊपर वाली भुजा वरमुद्रा में है और नीचे वाली भुजा में भी कमल पुष्प सुशोभित है।

वाहन: माँ का वाहन सिंह है, लेकिन वे स्वयं कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं, इसलिए इन्हें 'पद्मासना देवी' भी कहा जाता है।

पूजा का महत्व और आध्यात्मिक लाभ

नवरात्रि के पांचवें दिन स्कंदमाता की पूजा करने से साधक को निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:

आत्मविश्वास में वृद्धि: जो भक्त मानसिक रूप से कमजोर महसूस करते हैं, उन्हें माँ साहस और आंतरिक शक्ति प्रदान करती हैं।

मोक्ष का मार्ग: माँ की उपासना से भक्तों के लिए मोक्ष के द्वार खुलते हैं और सांसारिक दुखों से मुक्ति मिलती है।

संतान सुख: संतान प्राप्ति की कामना रखने वाले दंपत्तियों के लिए माँ स्कंदमाता की पूजा अत्यंत फलदायी मानी गई है।

पंचम दिन की पूजा विधि और भोग

भक्त आज के दिन सुबह जल्दी स्नान कर पीले वस्त्र धारण करते हैं। माँ स्कंदमाता को केले का भोग अति प्रिय है। पूजा के दौरान पीले फूल, फल और मिठाई अर्पित कर स्कंदमाता की आरती की जाती है। श्रद्धालु मंदिरों में उमड़ रहे हैं और माता से अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।

माँ स्कंदमाता की आरती

जय तेरी हो स्कंदमाता, पाँचवां नाम तुम्हारा आता। > सबके मन की जानन हारी, जग जननी सब की महतारी।। > तेरी जोत जलाता रहूँ मैं, हरदम शरण में आता रहूँ मैं। > नमो-नमो हे स्कंदमाता, संकट हरनी मंगल दाता।।

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