डिजिटल लत पर सरकार सख्त: बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर लग सकती है पाबंदी, उम्र सत्यापन होगा अनिवार्य
भारत सरकार ने देश के भविष्य यानी बच्चों और किशोरों में बढ़ती डिजिटल लत को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। गुरुवार को संसद में पेश आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में कहा गया है कि इंटरनेट मीडिया, ऑनलाइन गेमिंग और जुआ एप्स बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक जीवन को बर्बाद कर रहे हैं।
ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस की तर्ज पर तैयारी
सर्वेक्षण में सुझाव दिया गया है कि भारत को भी ऑस्ट्रेलिया, फिनलैंड और फ्रांस जैसे देशों की तरह बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग की उम्र सीमा तय करनी चाहिए।
उम्र सत्यापन: अब ऑनलाइन कंपनियों की जिम्मेदारी होगी कि वे यूजर्स की उम्र का सही सत्यापन करें।
स्मार्टफोन का विकल्प: बच्चों को महंगे स्मार्टफोन देने के बजाय बेसिक फोन या 'सुरक्षित डिजिटल डिवाइस' देने की सलाह दी गई है।
स्कूलों को सलाह: स्कूलों से अपील की गई है कि वे ऑनलाइन पढ़ाई पर निर्भरता कम करें।
भारत में डराने वाले आंकड़े
यूजर्स की फौज: भारत में 1 अरब से ज्यादा इंटरनेट यूजर हैं। यूट्यूब पर 50 करोड़, इंस्टाग्राम पर 48 करोड़ और फेसबुक पर 40 करोड़ से ज्यादा लोग सक्रिय हैं।
निशाने पर बच्चे: आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, इन ऐप्स का इस्तेमाल करने वालों में 75% से ज्यादा छोटी उम्र के यूजर्स हैं, जो नकारात्मक कंटेंट के प्रति सबसे ज्यादा संवेदनशील हैं।
मोटापा: 2035 तक 8 करोड़ से ज्यादा बच्चे होंगे शिकार
डिजिटल लत के साथ-साथ खराब खानपान (जंक फूड) ने मोटापे की समस्या को भी विकराल बना दिया है।
चिंताजनक अनुमान: साल 2020 में 3.3 करोड़ बच्चे मोटापे का शिकार थे, जो 2035 तक बढ़कर 8.3 करोड़ होने का अनुमान है।
बीमारियों का खतरा: गतिहीन जीवनशैली के कारण युवाओं में डायबिटीज और हृदय रोग तेजी से बढ़ रहे हैं।
गोवा और आंध्र प्रदेश ने की पहल
आर्थिक सर्वेक्षण में बताया गया कि गोवा और आंध्र प्रदेश जैसे राज्य अपने यहां छोटे बच्चों के लिए स्मार्टफोन प्रतिबंध लागू करने के लिए अंतरराष्ट्रीय नियमों का अध्ययन कर रहे हैं।
