शुगर के मरीज पी सकते हैं गन्ने का रस? एक्सपर्ट्स ने बताया सेहत पर इसका असर और जरूरी सावधानियां

By :  vijay
Update: 2026-03-31 01:40 GMT

गर्मी का मौसम आते ही गन्ने के रस की मांग बढ़ जाती है, लेकिन डायबिटीज (मधुमेह) के मरीजों के मन में हमेशा यह सवाल रहता है कि क्या वे इस मीठे प्राकृतिक पेय का आनंद ले सकते हैं। हालिया स्वास्थ्य रिपोर्टों और विशेषज्ञों के अनुसार, गन्ने का रस पीना शुगर के मरीजों के लिए जोखिम भरा हो सकता है, लेकिन इसके कुछ तकनीकी पहलू भी हैं जिन्हें समझना जरूरी है।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?

गन्ने का रस सीधे तौर पर चीनी (सुक्रोज) का प्राथमिक स्रोत है। विशेषज्ञों के अनुसार, एक गिलास गन्ने के रस में काफी मात्रा में कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट होते हैं। हालांकि इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) मध्यम श्रेणी (करीब 43 से 50 के बीच) में आता है, लेकिन इसका ग्लाइसेमिक लोड (GL) काफी अधिक होता है। इसका मतलब है कि इसे पीने के तुरंत बाद खून में शुगर का स्तर तेजी से बढ़ सकता है।

डायबिटीज के मरीजों के लिए जोखिम

शुगर स्पाइक: गन्ने के रस में फाइबर की मात्रा न के बराबर होती है, जिससे शरीर इसे बहुत जल्दी अवशोषित कर लेता है और इंसुलिन का स्तर अचानक बिगड़ सकता है।

वजन बढ़ना: इसमें कैलोरी की मात्रा अधिक होती है, जो वजन बढ़ाने का कारण बन सकती है, जो टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों के लिए हानिकारक है।

अगर पीना ही है, तो इन बातों का रखें ध्यान

डायबिटीज के डॉक्टर आमतौर पर गन्ने के रस से बचने की सलाह देते हैं, लेकिन कुछ विशेष स्थितियों में इसे सीमित किया जा सकता है:

लो-शुगर (Hypoglycemia) की स्थिति: यदि मरीज का शुगर लेवल अचानक बहुत कम हो जाए, तो गन्ने का रस एक 'लाइफ-सेवर' के रूप में काम कर सकता है।

मात्रा का ध्यान: यदि शुगर पूरी तरह नियंत्रण में है, तो कभी-कभी बहुत कम मात्रा (आधा गिलास) में नींबू और अदरक मिलाकर लिया जा सकता है, जो पाचन में मदद करता है।

खाली पेट न पिएं: इसे कभी भी खाली पेट न लें, वरना यह सीधा लिवर और ब्लड शुगर पर असर डालता है।

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