पेरेंट्स सावधान: चेन्नई में काजू फंसने से मासूम की मौत, छोटे बच्चों के लिए 'चोकिंग' बना बड़ा खतरा

Update: 2026-03-01 17:21 GMT


  हाल ही में चेन्नई में हुई एक हृदयविदारक घटना ने देशभर के माता-पिता को झकझोर कर रख दिया है। एक छोटी बच्ची के गले में काजू फंसने (चोकिंग) से उसकी जान चली गई। यह घटना महज एक हादसा नहीं, बल्कि छोटे बच्चों की सुरक्षा और खान-पान को लेकर एक गंभीर 'हेल्थ अलर्ट' है। डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों के गले में खाना फंसना एक आम लेकिन बेहद खतरनाक समस्या है, जो चंद मिनटों में जानलेवा साबित हो सकती है।

क्यों होता है छोटे बच्चों में ज्यादा खतरा?

चिकित्सकों के अनुसार, 3-4 साल से कम उम्र के बच्चों का गला और सांस की नली बहुत संकरी होती है। इस उम्र में बच्चे खाना ठीक से चबाना नहीं जानते और अक्सर जल्दबाजी में निगल लेते हैं। यदि कोई सख्त, गोल या छोटा खाद्य पदार्थ सीधे सांस की नली में चला जाए, तो ऑक्सीजन का प्रवाह रुक जाता है, जिससे बच्चा कुछ ही मिनटों में बेहोश हो सकता है।

इन चीजों से बढ़ जाता है जोखिम

डॉक्टरों ने सलाह दी है कि छोटे बच्चों को निम्नलिखित चीजें बहुत सावधानी से दें या देने से बचें:

साबुत मेवा: काजू, बादाम और मूंगफली।

गोल फल: अंगूर, चेरी या बेरीज जैसी गोल चीजें।

कैंडी: टॉफी या हार्ड कैंडी।

अन्य: पॉपकॉर्न और छोटे खिलौनों के बारीक पार्ट्स।

चोकिंग होने पर क्या करें?

अगर बच्चा अचानक खांसने लगे, सांस लेने में दिक्कत हो, आवाज न निकले या चेहरा नीला पड़ने लगे, तो बिना देरी किए ये कदम उठाएं:

मेडिकल इमरजेंसी: तुरंत नजदीकी अस्पताल या डॉक्टर से संपर्क करें।

फर्स्ट एड: छोटे बच्चों के लिए 'बैक ब्लो' (पीठ थपथपाने) जैसी प्राथमिक चिकित्सा तकनीक का ज्ञान होना हर अभिभावक के लिए जरूरी है।

निगरानी: बच्चों को हमेशा बैठकर और छोटे टुकड़ों में काटकर ही खाना खिलाएं। खाते समय उन्हें दौड़ने या खेलने न दें।

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