महाकालेश्वर धाम में कड़ाके की ठंड में महिला साधु की 11 दिवसीय जलधारा तपस्या

Update: 2026-01-07 05:07 GMT

 

जालौर ।जिले का भीनमाल क्षेत्र प्राचीन काल से ही ऋषियों और तपस्वियों की तपोभूमि के रूप में जाना जाता रहा है। यहां अलग अलग कालखंडों में संतों ने कठिन साधनाओं के माध्यम से ईश्वर उपासना की है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए शहर के क्षेमंकरी माता मंदिर के समीप स्थित श्री महाकालेश्वर धाम में इन दिनों एक अनूठी तपस्या देखने को मिल रही है।


महिला साधु राधागिरि महाराज कड़ाके की सर्दी के बीच जलधारा तपस्या कर रही हैं। यह तपस्या शनिवार से प्रारंभ हुई है और 14 जनवरी तक चलेगी। तपस्या के दौरान राधागिरि महाराज प्रतिदिन सुबह पांच बजे ऊँ नमः शिवाय मंत्र के जाप के साथ 108 ठंडे मटकों से अपने शरीर पर जलधारा करती हैं। ठंडे पानी की निरंतर धार के बीच उनकी एकाग्रता और साधना लोगों को चकित कर रही है।

जैसे ही जलधारा तपस्या शुरू होती है, पूरा मंदिर परिसर ओम नमः शिवाय के मंत्रोच्चार से गूंज उठता है। दीप और धूप के साथ चल रही यह साधना श्रद्धालुओं के लिए गहरी आध्यात्मिक अनुभूति का कारण बन रही है। कठोर मौसम के बावजूद राधागिरि महाराज पूरे संयम और साधना भाव के साथ तप में लीन रहती हैं।

महाकालेश्वर धाम के महंत नवीनगिरि महाराज ने बताया कि इस धाम में वर्षों से भक्ति, सेवा और साधना की परंपरा चली आ रही है, जो आज भी जीवंत है। उसी परंपरा के अंतर्गत राधागिरि महाराज 11 दिवसीय जलधारा तपस्या कर रही हैं, जिसमें प्रतिदिन 108 मटकों से जलधारा की जाती है।

इस अनूठी तपस्या को देखने और दर्शन करने के लिए दूर दूर से श्रद्धालु महाकालेश्वर धाम पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि इस तपस्या से उन्हें मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा की अनुभूति हो रही है। राधागिरि महाराज की यह जलधारा तपस्या 14 जनवरी तक जारी रहेगी।

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