तीर्थकर भगवान सम्भवनाथ के दरबार में कुछ भी असम्भव नहीं : आर्यिका सुभूषणमति

By :  vijay
Update: 2026-03-24 11:44 GMT

 

उदयपुर । बड़ा बाजार श्री संभवनाथ दिगम्बर जैन बीसपंथी दशा नागदा मंदिर में तीर्थकर भगवान सम्भवनाथ मोक्षकल्याणक के पावन अवसर पर ससंघ विराजमान जिनधर्म प्रभाविका गणिनी आर्यिका सुभूषणमती माताजी के श्रीमुख से निघृत मंत्रों के साथ मूलनायक भगवान संभवनाथ का श्रावक-श्राविकाओं द्वारा पंचामृत महामस्तकाभिषेक किया गया। मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष भंवरलाल गदावत ने बताया कि भगवान श्री संभवनाथ मोक्ष कल्याणक पर निर्माण लड्डू का सौभाग्य टेकचंद कीर्ति कुमार बसंतिलाल दिलीप कुमार मुंडलिया को प्राप्त हुआ। मंजू गदावत ने बताया मूल नायक भगवान की शांति धारा चंद्रपाल सुशीला कारवा परिवार द्वारा की गई। गणिनी आर्यिका105 सुभूषण माताजी का पद पक्षालन गणपत लाल जोलावत परिवार द्वारा किया गया। शांतिधारा के पश्चात् निर्वाण लड्डू (नुक्ती का लड्डू) अर्पण कर गुरु माँ का पादप्रक्षालन भी किया गया। इस पावन अवसर पर धर्मसभा को उद्बोधित करते हुए आर्यिका ने कहा कि- निर्वाण लड्डू अर्पित करते हुए निर्वाण प्राप्ति की पिपासा भी होनी चाहिए। मात्र कार्यक्रम करके आनंदित न हो अपितु भक्तिभाव से आपका मन आनंदित हो जाना चाहिए। यदि आप मुनि-आर्थिका नहीं बन पा रहे हो तो कम से कम सच्चे श्रावक-श्राविका तो बने क्योकि जिसने श्रावकत्व को समझ लिया, आचरण में उतार लिया तो मोक्ष कहीं दूर नहीं। याद रखना। अभिषेक बिना पूजन अधूरी है और अधूरी पूजन फलदायी नहीं हो सकती इसलिए, कम से कम एक कलश अभिषेक करके ही पूजन करे। जैन कुल मिला है, पांचों इन्डियों की पूर्णता है, मंदिर में भगवान विराजमान है, अब मन में भी भगवान को विराजमान कर भक्ति भाव से पूजन-अभिषेक करे। याद रखना। भगवान सम्भवनाथ के दरबार में कुछ भी असम्भव नहीं है। जिनेन्द्र भगवान की पूजन अभिषेक से चक्रवर्ती की सम्पदा भी मिलती है और परम्परा से मुक्ति भी मिलती है।

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