उदयपुर। राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (राजीविका) के तहत दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत जिला परियोजना प्रबंधन इकाई (डीपीएमयू) राजीविका, उदयपुर की ओर से एक दिवसीय बैंकर्स आमुखीकरण कार्यशाला बुधवार को जिला परिषद सभागार में जिला कलक्टर के निर्देशन एवं सीईओ जिला परिषद रिया डाबी के आतिथ्य में हुई। कार्यशाला में विभिन्न बैंकों के शाखा प्रबंधकों को ग्रामीण आजीविका मिशन की योजनाओं एवं बैंकिंग प्रक्रियाओं से अवगत कराया गया।
कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में जिला परियोजना प्रबंधक राजीविका ख्यालीलाल खटीक ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) की अवधारणा, लक्ष्य, प्रमुख घटकों तथा स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के बैंक लिंकेज के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। साथ ही बताया कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को वित्तीय सशक्तिकरण और स्वरोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
जिला प्रबंधक वित्तीय समावेशन शुभम् सोनी ने वित्तीय समावेशन, एसएचजी बैंक लिंकेज, आरबीआई के दिशा-निर्देश, केवाईसी मानदंड तथा समूहों के बचत खाते खोलने की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया। इसके अलावा स्वयं सहायता समूहों को ऋण उपलब्ध कराने, ऋण आवेदन की गुणवत्ता, टर्म लोन एवं कैश क्रेडिट लिमिट, क्रेडिट लिमिट के नवीनीकरण और वर्तमान वर्ष के लक्ष्यों की प्राप्ति की रणनीतियों पर भी चर्चा की गई।
अगले सत्र में बैंक सखी, बीसी सखी, डिजिटल वित्त, ऋण वसूली, सीबीआरएम, ड्यूल ऑथेंटिकेशन के लिए एसएचजी अकाउंट मैपिंग तथा समय पर ऋण चुकाने पर मिलने वाली ब्याज सब्सिडी जैसी व्यवस्थाओं की जानकारी दी गई। साथ ही बीमा और पेंशन जैसे सहायक वित्तीय उत्पादों तथा बैंक लिंकेज पोर्टल के उपयोग पर भी प्रस्तुति दी गई।
कार्यशाला में श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले शाखा प्रबंधकों ने एसएचजी लेंडिंग से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। अंत में शाखा प्रबंधकों के साथ संवादात्मक सत्र आयोजित कर समुदाय, राजीविका स्टाफ और बैंकों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई। कार्यक्रम के समापन पर राजीविका अधिकारियों ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बैंकों और स्वयं सहायता समूहों के बीच बेहतर समन्वय से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, उद्यमिता और आर्थिक सशक्तिकरण को नई गति मिलेगी।
