उदयपुर, । मालदास स्ट्रीट स्थित आराधना भवन में जैनाचार्य श्रीमद् विजय रत्नसेन सूरीश्वर महाराज की निश्रा में बड़े हर्षोल्लास के साथ चातुर्मासिक आराधना चल रही है।
संघ के कोषाध्यक्ष राजेश जावरिया ने बताया कि मालदास स्ट्रीट आराधना भवन में मंगलवार को मरुधररत्न आचार्य रत्नसेनसूरी महाराज ने कहा कि मनुष्य का जीवन निमित्त वासी होने से उसे जैसा निमित्त मिलता है वैसी विचार शैली में ढल जाता है। जैसे पानी का कोई रंग या कोई आकार नहीं है। इसमें जो रंग मिलाया जाय वह रंग और जिस बर्तन में रखा जाय उसके आकार में ढल जाता है वैसे ही हमारा मन आस-पास के वातावरण से प्रभावित होकर उसके अनुसार ढल जाता है। अच्छे निमित्तों को पाकर मन में अच्छे विचार आते है और बुरे निमित्तों को पाकर मन में बुरे विचार आते है। अत: मन को पावन और पवित्र बनाए रखने के लिए सत्संग की खूब आवश्यकता है। गृहस्थ जीवन में रहते हुए श्रावक गुरु भगवंतों के संपर्क में खूब परिमीत समय तक ही प्राप्त कर सकता है। प्रवचन आदि के माध्यम से गुरु भगवंत मन पर कुछ अच्छे संस्कारों का आलेखन करते है परंतु शेष काल में सांसारिक प्रवृत्तियों के कारण वे अच्छे संस्कार घूल हो जाते हैं। हमारे मन पर अच्छे संस्कारों की असर थोडी और बूरे संस्कारो की असर ज्यादा होती है।अत: अच्छे संस्कारों को बनाए रखने के लिए दिनभर सत्संग की आवश्यकता रहती है। उपधान तप के माध्यम से श्रावक भी साधु के संग में रहते हुए साधुवत् जीवन जीने का अवसर प्राप्त कर सकता है। गुरु के साथ में साधुवत् जीवन जीते हुए विविध तपश्चर्या करते हुए श्रावक को जो धार्मिक सूत्र के पठन-पाठन का अधिकार उपधान तप से होता है।
कोषाध्यक्ष राजेश जावरिया ने बताया कि 2 अक्टूबर से जैनाचार्य रत्नसेन सूरि की शुभ निश्रा में श्री महावीर विद्यालय चित्रकूट नगर में उपधान तप का मंगल प्रारंभ होगा ।