जिनवाणी का अवलम्बन श्रद्धा से पूर्ण हो : साध्वी जयदर्शिता

Update: 2025-09-10 10:54 GMT

उदयपुर। तपागच्छ की उद्गम स्थली आयड़ जैन मंदिर में श्री जैन श्वेताम्बर महासभा के तत्तवावधान में कला पूर्ण सूरी समुदाय की साध्वी जयदर्शिता श्रीजी, जिनरसा श्रीजी, जिनदर्शिता श्रीजी व जिनमुद्रा श्रीजी महाराज आदि ठाणा की चातुर्मास सम्पादित हो रहा है। महासभा के महामंत्री कुलदीप नाहर ने बताया कि बुधवार को आयड़ तीर्थ के आत्म वल्लभ सभागार में सुबह 7 बजे साध्वियों के सानिध्य में ज्ञान भक्ति एवं ज्ञान पूजा, अष्ट प्रकार की पूजा-अर्चना की गई। सभी श्रावक-श्राविकाओं ने जैन ग्रंथ की पूजा-अर्चना की।

बुधवार को आयड़ तीर्थ पर साध्वी जयदर्शिता श्रीजी ने कहा कि संसार अरण्य से निकल कर मोक्ष में जाने का एकाधिकार केवल दुर्लभ मनुष्य गति में है। मानव भव में जीव इतना समर्थ होता है कि जन्म-मरण की बेडिय़ा तोड सके पर यह संभव तभी है जब आत्मा को जिनवाणी का अवलम्बन मिले, उस पर श्रद्धा निरन्तर दृढ़तर होती जाए। पुण्योदय से प्राप्त विपूल योग सामग्री भी उसे बोझ रूप लगे, उससे छूटकर मोझ जाने की उत्कट अभिलाषा जागृत हो जाए। मोहनीय कर्म इस इच्छा में सबसे बड़ा बायक है। इस कर्म के दो भेद है 1 दर्शन मोहनीय ( मिध्यात्व) 2- चारित्र मोहनीय (अविरती) मिध्यात्व के उदय से आत्मा शुद्ध तत्त्व को समझ नहीं पाता, अविरती के उदय से सम्यक् आराधना नहीं कर सकता। यह विचार विवेचन परमात्मा महावीर की देशना उत्तराध्ययन सूत्र के माध्यम से बताई। हमें जिनवाणी का श्रवण श्रद्धा पूर्वक भक्ति पूर्वक बहुमान पूर्वक श्रवण करना चाहिए। श्रवण के पश्चात उस पर चिंतन-मनन करना चाहिए। आत्मा को अच्छे विचारों में, मन को अच्छे चिंतन में जोडने से आत्मा की उध्र्व गति होती है। और आत्मा का कल्याण होकर उच्च स्थान पर निवास होता है।

नाहर ने बताया कि तीन दिवसीय आयोजन के तहत 13 सितम्बर को पंचकल्याण पूजा का आयोजन होगा उसके ृृृ14 सितम्बर को 18 अभिषेक का आयोजन होगा तथा 15 सितम्बर को शांति स्नात्र महोत्सव का आयोजन होगा। शांति स्नात्र में 10 दिगपाल, 9 नवग्रह एवं पाटला पूजन, कुंभ स्थापना का आयोजन होगा।

इस अवसर पर कुलदीप नाहर, भोपाल सिंह नाहर, अशोक जैन, संजय खाब्या, भोपाल सिंह परमार, सतीश कच्छारा, चतर सिंह पामेचा, राजेन्द्र जवेरिया, अंकुर मुर्डिया, पिन्टू चौधरी, हर्ष खाब्या, गजेन्द्र खाब्या, नरेन्द्र सिरोया, राजू पंजाबी, रमेश मारू, सुनील पारख, पारस पोखरना, राजेन्द्र जवेरिया, प्रकाश नागौरी, दिनेश बापना, अभय नलवाया, कैलाश मुर्डिया, गोवर्धन सिंह बोल्या, दिनेश भंडारी, रविन्द्र बापना, चिमनलाल गांधी, प्रद्योत महात्मा, रमेश सिरोया, कुलदीप मेहता आदि मौजूद रहे।

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