आस्था की दहलीज पर थम गई सांसें:: बीमारी से जंग लड़ रही जमना ने माता के दर पर तोड़ा दम
भीलवाड़ा BHN. | आस्था और उम्मीद जब लाचारी के आगे घुटने टेक देती है, तो मंजर बड़ा हृदयविदारक होता है। पाली जिले से एक ऐसी ही दुखद खबर सामने आई है, जहां अपने जीवन की सलामती की दुआ मांगने आई एक महिला की मौत माता के मंदिर की चौखट पर ही हो गई।
इलाज की आस में पहुंची थी मां के द्वार
मिली जानकारी के अनुसार, पाली जिले की रहने वाली 25 वर्षीय जमना भील पिछले काफी समय से टीबी (TB) जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही थी। लंबी बीमारी के कारण शरीर पस्त हो चुका था, लेकिन परिवार के मन में एक आस बाकी थी। इसी उम्मीद के सहारे परिजन उसे इलाज और दुआ के लिए बांक्यारानी माता जी के मंदिर लेकर आए थे।
पति और पिता के लौटने से पहले ही टूट गई सांस की डोर
शंभूगढ़ थाना पुलिस ने बताया कि रविवार को जब जमना का पति और पिता पास ही स्थित एक अन्य मंदिर में दर्शन करने गए थे, तब जमना बांक्यारानी माता मंदिर के द्वार पर ही बैठी थी। नियति को कुछ और ही मंजूर था; अपनों के लौटने से पहले ही जमना की सांसों ने उसका साथ छोड़ दिया। जब परिजन वापस लौटे, तो वहां खुशियों की जगह मातम पसरा हुआ था।
बिना पोस्टमार्टम के सुपुर्द किया शव
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घटनाक्रम की जानकारी ली। पुलिस ने बताया कि मृतका लंबे समय से बीमार चल रही थी।परिजनों ने किसी भी तरह की पुलिस कार्रवाई या पोस्टमार्टम कराने से साफ इनकार कर दिया। परिजनों की लिखित सहमति के बाद पुलिस ने बिना किसी कानूनी उलझन के शव उन्हें सौंप दिया।
एक तरफ भक्ति का अटूट विश्वास था और दूसरी तरफ बीमारी का करूर प्रहार। जिस दहलीज पर जमना ने जीवन की भीख मांगी थी, वही दहलीज उसकी अंतिम यात्रा का साक्षी बनी।
