इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा का इस्तीफा: घर में कैश मिलने और महाभियोग के बाद लिया फैसला

Update: 2026-04-10 08:26 GMT


प्रयागराज/नई दिल्ली। इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। जस्टिस वर्मा ने 9 अप्रैल को अपना इस्तीफा राष्ट्रपति को भेजा, जिसकी पुष्टि 10 अप्रैल को हुई। यह घटनाक्रम उनके दिल्ली स्थित सरकारी आवास पर हुई अग्नि दुर्घटना और उसके बाद मिले भारी कैश के विवाद के बाद सामने आया है।

नोटों के बंडलों ने खड़ा किया था विवाद

विवाद की शुरुआत 14 मार्च 2025 को हुई थी, जब जस्टिस वर्मा के दिल्ली स्थित सरकारी बंगले में अचानक आग लग गई थी। आग बुझाने के दौरान वहां 500-500 रुपये के नोटों के भारी मात्रा में बंडल बरामद हुए थे। इस घटना के बाद हड़कंप मच गया और आनन-फानन में उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट से स्थानांतरित कर इलाहाबाद हाईकोर्ट भेज दिया गया था।

शपथ के बाद भी नहीं मिला कोई काम

जस्टिस वर्मा ने 5 अप्रैल 2025 को इलाहाबाद हाईकोर्ट में न्यायाधीश के रूप में शपथ तो ली, लेकिन उन्हें कोई न्यायिक जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई। प्रशासन ने स्पष्ट किया था कि जब तक मामले की जांच पूरी नहीं हो जाती, उन्हें न्यायिक कार्यों से दूर रखा जाएगा। बिना किसी पोर्टफोलियो के रहने के कुछ ही दिनों बाद उन्होंने पद छोड़ने का निर्णय लिया।

महाभियोग और कानूनी लड़ाई

घर से बरामद कैश के मामले में उनके खिलाफ लोकसभा में महाभियोग प्रस्ताव लाया गया था। जस्टिस वर्मा ने इस प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। उनकी दलील थी कि महाभियोग प्रस्ताव दोनों सदनों में लाया गया था, लेकिन राज्यसभा ने इसे स्वीकार नहीं किया। उनका तर्क था कि राज्यसभा की अस्वीकृति के बावजूद लोकसभा द्वारा जांच समिति का गठन करना संवैधानिक रूप से गलत है। सुप्रीम कोर्ट में याचिका लंबित होने के बीच ही उन्होंने अपना इस्तीफा सौंप दिया है।

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