ईरान-इजराइल जंग का 22वां दिन: नतांज न्यूक्लियर सेंटर पर हवाई हमला, रूस ने जताई कड़ी आपत्ति
तेहरान/यरुशलम। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच छिड़ी जंग आज 22वें दिन में प्रवेश कर गई है। तनाव उस वक्त चरम पर पहुंच गया जब ईरान की तसनीम न्यूज एजेंसी ने दावा किया कि आज सुबह अमेरिका और इजराइल ने ईरान के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण नतांज न्यूक्लियर सेंटर (अहमदी रोशन) पर हवाई हमला किया है।
हमले पर विरोधाभासी दावे:
जहाँ ईरानी मीडिया इसे अमेरिका और इजराइल की संयुक्त कार्रवाई बता रहा है, वहीं इजराइली सेना (IDF) ने इस हमले में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया है। IDF ने बयान जारी कर कहा, "हमने यह हमला नहीं किया है और न ही हमें इसकी जानकारी है। हम अमेरिकी कार्रवाई पर कोई टिप्पणी नहीं करते।" दूसरी ओर, अमेरिकी सैन्य अधिकारी ब्रैड कूपर ने पुष्टि की है कि उनकी सेना ने ईरान के एक सीक्रेट अंडरग्राउंड ठिकाने पर बमबारी की है, जहाँ मिसाइलें और हथियार जमा किए गए थे।
इजराइल ने तेहरान में मिसाइल बनाने वाले ठिकानों पर हमला किया
इजराइल की सेना ने कहा है कि उसने रात में ईरान की राजधानी तेहरान में कई जगहों पर हमला किया। इजराइल का दावा है कि उसने इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के एक बड़े सेंटर को निशाना बनाया, जहां बैलिस्टिक मिसाइल के पार्ट्स बनाए जाते थे।
इसके अलावा मिसाइल के पार्ट्स रखने की जगह, रक्षा मंत्रालय से जुड़े एक कैंपस और मिसाइल बनाने की दूसरी फैक्ट्री पर भी हमला किया गया। इजराइल का कहना है कि इन हमलों से ईरान की मिसाइल बनाने की क्षमता को काफी नुकसान पहुंचा है। हालांकि, इन हमलों में कितने लोग मारे गए या घायल हुए, इसकी जानकारी नहीं दी गई है।
परमाणु केंद्र सुरक्षित, रिसाव का खतरा नहीं
राहत की बात यह है कि मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नतांज न्यूक्लियर प्लांट पर हुए हमले के बाद किसी भी तरह का रेडियोएक्टिव (परमाणु) रिसाव नहीं हुआ है। प्लांट का बड़ा हिस्सा जमीन के नीचे होने के कारण वह सुरक्षित बताया जा रहा है और आसपास रहने वाली आबादी को फिलहाल कोई खतरा नहीं है।
रूस ने दी चेतावनी, अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया
रूस ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है। रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन करार दिया। ईरान ने इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) को भी भेज दी है।
60 साल में पहली बार अल-अक्सा मस्जिद ईद पर बंद
जंग का साया त्योहारों पर भी साफ दिख रहा है। 1967 के अरब-इजराइल युद्ध के बाद पहली बार यरुशलम स्थित अल-अक्सा मस्जिद को ईद की नमाज के लिए बंद कर दिया गया है। ईरान के बाजारों में वीरानी छाई है, वहीं कतर, यूएई और कुवैत जैसे देशों में सुरक्षा कारणों से खुले मैदानों में नमाज पढ़ने पर रोक लगा दी गई है।
ईरान का पलटवार: 'ट्रम्प को सिखाएंगे सबक'
ईरानी अधिकारियों ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि वे डोनाल्ड ट्रम्प को सबक सिखाएंगे। ईरान का कहना है कि उन्हें ट्रम्प की शांति की बातों पर भरोसा नहीं है, क्योंकि जमीन पर अमेरिकी हमले लगातार जारी हैं।
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