घटेंगे तो कटेंगे, घुसपैठ और भ्रष्टाचार ने बदली देश की डेमोग्राफी, अब एक देश एक विधान की हुंकार
भीलवाड़ा। देश में बढ़ती घुसपैठ, सनातन संस्कृति पर हमले और भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ शनिवार को भीलवाड़ा में तीखी चेतावनी गूंज उठी। जनचेतना मंच राजस्थान की ओर से रामराज्य विषय पर आयोजित संगोष्ठी में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और प्रख्यात चिंतक अश्विनी उपाध्याय ने साफ शब्दों में कहा कि अगर देश में जनसंख्या संतुलन बिगड़ता रहा तो भविष्य भयावह होगा। उन्होंने दो टूक कहा कि हम बंटे नहीं, लेकिन अगर घटते चले गए तो कटने से कोई नहीं बचा पाएगा।
करीब एक घंटे तक चले बेबाक और तीखे उद्बोधन में उपाध्याय ने कहा कि आजादी के 75 साल बाद भी देश अंग्रेजों द्वारा बनाए गए कानूनों की बेड़ियों में जकड़ा है। यही कानून सनातन संस्कृति के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुके हैं। अब समय आ गया है कि संसद से लेकर सड़क तक एक देश एक विधान की आवाज बुलंद की जाए।
घुसपैठ पर बड़ा हमला
उपाध्याय ने कहा कि देश में अवैध घुसपैठ केवल सीमा सुरक्षा का मुद्दा नहीं बल्कि राष्ट्र की डेमोग्राफी बदलने की साजिश है। करोड़ों लोग अवैध रूप से देश में घुस चुके हैं और भ्रष्ट सिस्टम के कारण उन्हें पहचान पत्र से लेकर वोट तक मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब तक उस भ्रष्ट व्यवस्था पर लगाम नहीं कसी जाएगी, घुसपैठ नहीं रुकेगी। वोट बैंक की राजनीति करने वाले लोग इन घुसपैठियों को संरक्षण दे रहे हैं, जो सीधे-सीधे राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है।
मंदिर सरकारी कब्जे में क्यों
अश्विनी उपाध्याय ने सवाल उठाया कि देश में चार लाख से ज्यादा मंदिर सरकारी नियंत्रण में क्यों हैं, जबकि अन्य धर्मों के पूजा स्थल इससे बाहर हैं। अगर मंदिरों को मुक्त किया जाए तो वहीं से मिलने वाले संसाधनों से गौसेवा, शिक्षा और मानव सेवा के बड़े कार्य हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था समानता के अधिकार के खिलाफ है।
धर्म और मजहब में फर्क बताया
अपने भाषण में उपाध्याय ने धर्म और मजहब के फर्क को स्पष्ट करते हुए कहा कि धर्म कभी भेदभाव नहीं सिखाता और न ही दूसरों को खत्म करने की बात करता है, जबकि मजहब खुद को श्रेष्ठ मानकर दूसरों को दबाने की मानसिकता पैदा करता है। उन्होंने मांग की कि धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के तहत हिंदुओं को भी अपने धार्मिक प्रतीक रखने का पूरा अधिकार मिलना चाहिए।
करोड़ों की आबादी वाला अल्पसंख्यक कैसे
अल्पसंख्यक मुद्दे पर बोलते हुए उपाध्याय ने कहा कि दुनिया के किसी भी देश में करोड़ों की आबादी वाला समाज अल्पसंख्यक नहीं हो सकता। भारत में अल्पसंख्यक के नाम पर दी जा रही विशेष सुविधाएं खत्म कर सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और कर्तव्य तय किए जाने चाहिए। मजहबी आधार पर चलने वाली संस्थाओं को सरकारी सहायता नहीं मिलनी चाहिए और पूरे देश में एक समान पाठ्यक्रम लागू होना चाहिए।
विधायक का अनोखा दृश्य
संगोष्ठी के दौरान उस समय सभागार तालियों से गूंज उठा जब भीलवाड़ा विधायक अशोक कोठारी मंच छोड़कर श्रोताओं की पंक्ति में बैठ गए। उपाध्याय ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में पहली बार ऐसा विधायक देखा है जो वक्ता को सुनने के लिए मंच से नीचे आ गया।
कार्यक्रम में हरिशेवाधाम के महामंडलेश्वर हंसारामजी महाराज, जनचेतना मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ आई एम सेठिया, पूर्व न्यास अध्यक्ष लक्ष्मीनारायण डाड सहित कई प्रमुख सामाजिक और धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन सीताराम सोनी ने किया और आभार जिलाध्यक्ष उच्छब सोनी ने जताया।
