भीलवाड़ा में वर्षों की परंपरा गाजे-बाजे के साथ निकलेगी जिंदा मुर्दे की सवारी
भीलवाड़ा शहर में वर्षों पुरानी अनोखी परंपरा के तहत इस वर्ष भी जिंदा मुर्दे की सवारी गाजे-बाजे और ढोल-नगाड़ों के साथ निकाली जाएगी। होली के बाद निकलने वाली इस परंपरागत सवारी को देखने के लिए शहर और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।
इस अनूठी परंपरा में एक व्यक्ति को मुर्दे की तरह अर्थी पर लिटाया जाता है और उसे कंधों पर उठाकर शहर के विभिन्न मार्गों से जुलूस के रूप में निकाला जाता है। सवारी के दौरान ढोल-नगाड़ों की थाप, पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन और लोगों की उत्साहपूर्ण भागीदारी माहौल को खास बना देती है। रास्ते भर लोग इस सवारी का स्वागत करते हैं और कई स्थानों पर पुष्प वर्षा भी की जाती है।
स्थानीय लोगों के अनुसार यह परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है और इसका उद्देश्य सामाजिक एकता, आपसी भाईचारा और लोक परंपराओं को जीवित रखना है। हर साल इस सवारी में युवाओं के साथ बुजुर्ग भी उत्साहपूर्वक भाग लेते हैं।
आयोजकों ने बताया कि सवारी तय मार्गों से गुजरते हुए शहर के प्रमुख इलाकों में निकाली जाएगी, जहां सुरक्षा और व्यवस्था के लिए स्वयंसेवकों की भी व्यवस्था की गई है।
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