एनजीटी से जिन्दल सॉ लिमिटेड को बड़ी राहत: गौशाला और पौधारोपण के मामले में जाजू की याचिका खारिज

Update: 2026-04-08 12:23 GMT


भीलवाड़ा। हलचल । राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (N.G.T.) की सेंट्रल जोन बेंच, भोपाल ने जिन्दल सॉ लिमिटेड के खिलाफ दायर एक महत्वपूर्ण याचिका को खारिज कर दिया है। माननीय न्यायालय ने 07 अप्रैल, 2026 को अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि कंपनी ने पूर्व में जारी आदेशों की पूर्ण अनुपालना की है और उन पर लगाए गए आरोप निराधार हैं।

पर्यावरणविद् बाबूलाल जाजू द्वारा दायर निष्पादन आवेदन (Execution Application No. 01/2026) में आरोप लगाया गया था कि जिन्दल सॉ लिमिटेड द्वारा गौशाला का संचालन नहीं किया जा रहा है, भीलवाड़ा शहर के लावारिस मवेशियों को नहीं रखा जा रहा है और आवंटित 400 बीघा भूमि पर पौधारोपण व चारा उगाने की व्यवस्था नहीं की गई है।

गौशाला संचालन पर न्यायालय की टिप्पणी

न्यायालय ने मामले की समीक्षा के बाद पाया कि 11 सितंबर, 2017 को पारित मूल आदेश में कंपनी को गौशाला के रखरखाव का कोई निर्देश नहीं दिया गया था। वास्तविकता यह है कि:

कंपनी ने ग्रामवासियों और ग्राम पंचायत दरीबा के अनुरोध पर एक गौशाला का निर्माण करवाया था।

निर्माण के पश्चात यह गौशाला ग्राम पंचायत दरीबा को सुपुर्द कर दी गई थी, जिसका वर्तमान में संपूर्ण रखरखाव और संचालन पंचायत द्वारा ही किया जा रहा है।

कंपनी अपने लीज क्षेत्र के गांवों में पशुओं के लिए नियमित रूप से चारा उपलब्ध करवा रही है।

400 बीघा भूमि और पौधारोपण की सच्चाई

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार द्वारा आवंटित 400 बीघा चरागाह भूमि कंपनी को खनन और सहायक गतिविधियों के लिए दी गई है, न कि गौशाला स्थापना या पौधारोपण के लिए। इस भूमि पर खनन हेतु जिला कलेक्टर, भीलवाड़ा द्वारा अनापत्ति (NOC) भी जारी की जा चुकी है।

वहीं, पौधारोपण के संबंध में एनजीटी ने पाया कि:

कंपनी पहले ही 10,000 से अधिक पौधे लगा चुकी है, जिसकी पुष्टि वन विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और खान विभाग के अधिकारियों ने फरवरी 2022 की निरीक्षण रिपोर्ट में की थी।

कंपनी अब तक अपने लीज और आसपास के क्षेत्र में कुल 2,06,388 पेड़ लगा चुकी है।



याचिका खारिज होने का मुख्य आधार

माननीय प्राधिकरण ने माना कि मूल प्रकरण (Original Application) का मुख्य उद्देश्य एसटीपी (STP) का निर्माण करना था, जो कंपनी द्वारा काफी पहले ही पूरा किया जा चुका है। गौशाला निर्माण या संचालन इस प्रकरण का मुख्य हिस्सा नहीं था। अतः न्यायालय ने माना कि अब मामले में कुछ भी शेष नहीं बचा है और  जाजू द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया।

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