'गांव चलो अभियान' अब 'ग्रामीण सेवा शिविर', 17 सितंबर से शुरू
राजस्थान सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासन को सीधे जनता की चौखट तक पहुंचाने के लिए 'गांव चलो अभियान' को नया रूप और नाम दिया है। अब इसे 'ग्रामीण सेवा शिविर' के नाम से जाना जाएगा। यह शिविर 17 सितंबर 2025 से शुरू होंगे, जो पहले 18 सितंबर को प्रस्तावित थे। भीलवाड़ा जिला प्रशासन ने इस अभियान को जिले की प्रत्येक ग्राम पंचायत में लागू करने की योजना बनाई है, जिसका उद्देश्य ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं का लाभ, प्रशासनिक सेवाएं, और त्वरित समस्या समाधान उपलब्ध कराना है।
अभियान की संरचना और समय-सारिणी
जिला कलेक्टर ने बताया कि पहले सप्ताह में शिविर बुधवार से शनिवार तक प्रत्येक दिन दो-दो ग्राम पंचायतों में आयोजित किए जाएंगे। इसके बाद, अभियान के शेष शिविर हर सप्ताह गुरुवार, शुक्रवार, और शनिवार को आयोजित होंगे, जब तक कि जिले की सभी ग्राम पंचायतों को कवर नहीं कर लिया जाता। यह सुनिश्चित करेगा कि कोई भी पंचायत छूटे नहीं और ग्रामीणों को समान अवसर मिले।
शिविरों का शेड्यूल
पहला सप्ताह (17-20 सितंबर 2025): प्रत्येक दिन दो ग्राम पंचायतों में शिविर।आगामी सप्ताह: गुरुवार, शुक्रवार, और शनिवार को दो-दो पंचायतों में शिविर।
लक्ष्य: जिले की सभी ग्राम पंचायतों को कवर करना।
उद्देश्य और सेवाएं
'ग्रामीण सेवा शिविर' का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों को आत्मनिर्भर, स्वच्छ, जागरूक, और सशक्त बनाना है। इन शिविरों में निम्नलिखित सेवाएं प्रदान की जाएंगी:
राजस्व विभाग: लंबित फार्मर रजिस्ट्री पूर्ण करना, आपसी सहमति से भूमि विभाजन, किसान गिरदावरी ऐप डाउनलोड कराना, नामांतरण, मूल निवास, और जाति प्रमाण पत्र जारी करना।ग्रामीण विकास विभाग: बीपीएल परिवारों का सर्वे, विकास कार्यों की स्वीकृतियां।
पंचायती राज विभाग: स्वामित्व योजना के तहत पट्टों के लिए आवेदन और वितरण, वृक्षारोपण, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत स्वीकृतियां।
चिकित्सा विभाग: मातृ और शिशु स्वास्थ्य जांच, कैंसर और सिकल सेल रोग की स्क्रीनिंग, बच्चों का टीकाकरण, टीबी मुक्त भारत अभियान, और पीएमजेवाई कार्ड वितरण।
पशुपालन विभाग: पशु स्वास्थ्य शिविर और टीकाकरण।
ऊर्जा विभाग: बिजली से जुड़ी समस्याओं का समाधान।
कृषि विभाग: किसानों को बीज और उर्वरक संबंधी सहायता।
'गांव चलो अभियान' का नाम बदलकर 'ग्रामीण सेवा शिविर' करने का निर्णय राज्य सरकार की ग्रामीण विकास पर बढ़ती प्रतिबद्धता को दर्शाता है। भीलवाड़ा, जो अपनी टेक्सटाइल इंडस्ट्री और कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था के लिए जाना जाता है, में अतिवृष्टि और बाढ़ जैसी समस्याओं ने किसानों को प्रभावित किया है। हाल ही में, कांग्रेस पार्टी ने किसानों के मुआवजे और अन्य मुद्दों को लेकर आंदोलन की घोषणा की थी, जिसका उल्लेख इस खबर में नहीं है, लेकिन यह अभियान उस आलोचना के जवाब में देखा जा सकता है।
