राहत वाली खबर: भीलवाड़ा सहित प्रदेश की 23 हजार खदानों की जांच के लिए कमेटी का गठन, बंद होने का संकट टला
भीलवाड़ा। भीलवाड़ा जिले के साथ ही प्रदेश में एनवायरनमेंट क्लीयरेंस सर्टिफिकेट (ईसी) के लिए केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 10 दिसंबर को अधिसूचना जारी कर राज्य स्तर पर पर्यावरण समाघात निर्धारण प्राधिकरण का गठन कर दिया है। प्राधिकरण की सहायता के लिए प्रदेशभर में 4 विशेषज्ञ मूल्यांकन समितियों (सिया) का गठन किया है। भीलवाड़ा को चौथी समिति में रखा गया।
इस समिति के अध्यक्ष पूर्व सीसीएफ राहुल भटनागर को बनाया है जबकि ओम प्रकाश शर्मा, नवीन कुमार व्यास, सतीश कुमार श्रीमाली, डॉ. अनुपम भटनागर को सदस्य के रूप में शामिल किया हैं। इस समिति में उदयपुर जोन के भीलवाड़ा ,उदयपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, डूंगरपुर, राजसमंद और चित्तौड़गढ़ जिले शामिल हैं।ये समितियां अगले साढ़े तीन माह में प्रदेश में करीब 23 हजार खदानों की ईसी की जांच करेंगी। इनमें भीलवाड़ा सहित उदयपुर जोन की करीब 10 हजार 600 माइंस की फाइलें शामिल हैं। बता दें कि पर्यावरण संबंधी जांच कमेटी गत 12 अक्टूबर को भंग होने के बाद प्रदेश में खदानों की ईसी नहीं होने से इनके बंद होने का संकट गहरा गया था।इससे लाखों लोगों के बेरोजगार होने की भी आशंका थी।उधर,खान एवं पेट्रोलियम विभाग के प्रमुख शासन सचिव टी. रविकांत ने गत 28 नवंबर को आदेश जारी किया था। इसमें कहा था कि प्रदेश में संचालित खदानों की लीज के लिए 31 मार्च, 2025 तक सिया कमेटी से ईसी का पुनर्निरीक्षण करवाना होगा। ऐसा नहीं करने की स्थिति में 31 मार्च के बाद उन्हें किसी भी तरह के खनन कार्य करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। पालना नहीं करने वाले खनन पट्टों और क्वारी लाइसेंस को खत्म करने की कार्रवाई होगी।