चर्चा चाय पर: बढ़ता कुंवारापन, घटते रिश्ते – समाज के सामने नई चुनौती

By :  vijay
Update: 2026-03-22 12:31 GMT

भीलवाड़ा अब वक्त आ गया है कि चीज़ों को मीठे शब्‍दों में कहना बंद किया जाए। दुनिया जिस आर्थिक आज़ादी की जय-जयकार कर रही है, वही आज़ादी धीरे-धीरे परिवार, रिश्तों, और सामाजिक संतुलन, सब कुछ निगलने लगी है।

आर्थिक आज़ादी की अंधी दौड़ में माहेश्वरी समाज कुंवारेपन के विस्फोट के कगार पर आ खड़ा हुआ है ! अंतरराष्ट्रीय सर्वे कहता है कि आने वाले कुछ वर्षों में 45% तक युवक युवतियां विवाह से दूरी बना सकते हैं। पहली नज़र में यह प्रगति लगती है, पर असल में यह भविष्य के लिए एक टाइम-बम है।

अन्तर्राष्ट्रीय माहेश्वरी कपल क्लब भारत भीलवाड़ा जिला शाखा द्वारा आयोजित चर्चा चाय पर - " परिवार रहेगा तो समाज रहेगा " विषय पर निम्न तथ्य उभर कर सामने आये - आर्थिक आज़ादी की अंधी दौड़ में समाज कहाँ पहुँच रहा है ?

1- कैरियर, पैसा और अकेलापन….यह कैसी प्रगति?

आज की बेटी डॉक्टर, इंजीनियर, सीए, उद्यमी, सब बन रही है। बहुत अच्छी शानदार बात है , पर क्या कैरियर पूरा जीवन है?

पैसा साथी नहीं बनता। पद पोस्ट वृद्धावस्था में हाथ नहीं पकड़ती । मोबाइल और लैपटॉप बुढ़ापे में बात नहीं करते। लेकिन समाज को इस सच्चाई से फर्क नहीं पड़ता, सबको आर्थिक दौड़ लगानी है… बस लगानी है।

2.परिवार ढह रहे हैं…. देख सब रहे है, बोल कोई नहीं रहा ??

कुँवारे लड़के बढ़ रहे हैं, अविवाहित युवतियाँ बढ़ रही हैं, जनसंख्या गिर रही है, और अकेलेपन उद्योग (counsellor, therapy, depression pills) फल-फूल रहे है । पर फिर भी समाज के कर्णधार कहते हैं, - आधुनिक युग है सब ठीक है ! यह आधुनिकता नहीं धीमी मौत है, परिवार, समाज और मानवीय संबंधों की।

3.सर्वाधिक खतरनाक स्थिति.....आज माता-पिता रिश्ता ढूंढते हैं, पर लड़के लड़की कहते है - अभी नहीं । फिर " अभी नहीं, धीरे-धीरे "कभी नहीं" में बदल जाता है और जब एहसास होता है तो मेडिकल रिपोर्ट सामने होती है, हार्मोनल इश्यू, कंसिव न होना, मानसिक तनाव, अकेलापन। फिर अन्तर्जातीय विवाह, पर तब कौन जिम्मेदार ? कोई नहीं, क्योंकि फैसला स्वतंत्रता का था।

4.- सामाजिक संगठन चुप क्यों हैं ..??

क्योंकि सच्चाई बोलने से उन्हें आधुनिकता-विरोधी कहलाने का डर है। पर सच्चाई यह है कि अगर 21–25 की उपयुक्त उम्र में विवाह नहीं हुए तो जल्द ही माहेश्वरी समाज कुंवारेपन की विस्फोटक स्थिति में पहुंच जाएगा !

5.अंतिम बात….. " प्रगति वो नहीं जो हमें अकेला कर दे। अगर हमारा भविष्य कुंवारा, अकेला और भावहीन होने वाला है, तो समाज के लिए यह "गर्व की नहीं, खतरे की घंटी " है।

अन्तर्राष्ट्रीय माहेश्वरी कपल क्लब भारत के राष्ट्रीय महासचिव अनिता डॉ अशोक सोडाणी ने बताया कि उक्त विचारों को क्लब की सभी 133 जिला व नगर शाखाओं तथा माहेश्वरी समाज के सभी नीति निर्धारक प्रमुख संगठनों को भेजा जा रहा है ! 

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