विधानसभा में विधायक का हमला, मांडलगढ़ के विकास और ओलावृष्टि मुआवजे पर रखी मांग
आकोला( रमेश चंद्र डाड) मांडलगढ़ विधायक ने विधानसभा में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान पिछली कांग्रेस सरकार पर तीखा तंज कसा। विधायक ने आंकड़ों के जरिए पूर्ववर्ती कांग्रेस की गहलोत सरकार की विफलताओं को उजागर करते हुए वर्तमान भाजपा की भजन लाल शर्मा के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार के विकासोन्मुखी विजन को रखा।
कांग्रेस सरकार की 'वोट बैंक' राजनीति पर प्रहार:
विधायक ने सदन में कहा कि पिछली गहलोत सरकार की योजनाएं केवल चुनाव और वोट बैंक को ध्यान में रखकर बनाई गई थीं, जो धरातल पर समय पर पूरी नहीं हो सकीं। उन्होंने तुलना करते हुए बताया कि:
बजट में भेदभाव: जहाँ 2022-23 में ग्रामीण विकास का बजट मात्र ₹20,600 करोड़ था, वहीं वर्तमान भाजपा सरकार ने इसे 38% बढ़ाकर ₹28,400 करोड़ कर ऐतिहासिक वृद्धि की है।
मनरेगा और आवास: पिछली सरकार के समय मनरेगा में मात्र 24 करोड़ मानव दिवस और 1.85 लाख आवासों का लक्ष्य था, जबकि वर्तमान सरकार ने इसे बढ़ाकर 30 करोड़ मानव दिवस और 2.75 लाख नए आवासों का लक्ष्य रखा है।
भ्रष्टाचार और पारदर्शिता: पिछली सरकार में नरेगा भुगतान में देरी और अनिमितताएँ थीं, जिसके समाधान के लिए वर्तमान सरकार ने ₹350 करोड़ के डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम का प्रावधान किया है।
मांडलगढ़ की प्रमुख मांगें:
विधायक ने तंज कसते हुए कहा कि अब 'घोषणाओं की राजनीति' का अंत हो गया है और 'परिणाम आधारित शासन' शुरू हुआ है। उन्होंने मांडलगढ़ क्षेत्र के लिए विशेष मांगें रखीं:
ओलावृष्टि मुआवजा: बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से रबी की फसल को हुए भारी नुकसान की तुरंत विशेष गिरदावरी करवाकर किसानों को राहत दी जाए।
पंचायत स्तर पर खेल स्टेडियम: ग्रामीण प्रतिभाओं के निखार के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत में खेल स्टेडियम का निर्माण हो।
बुनियादी ढांचा: क्षेत्र की सड़कों के सुदृढ़ीकरण और प्रधानमंत्री आवास योजना में मांडलगढ़ को प्राथमिकता मिले।
विधायक खंडेलवाल ने अंत में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार राजस्थान को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने के लिए संकल्पबद्ध है।
