भीलवाड़ा नाट्य महोत्सव का समापन, जामुन का पेड़ और खांचे नाटकों ने छोड़ी गहरी छाप

Update: 2026-01-12 14:31 GMT

भीलवाड़ा | रसधारा सांस्कृतिक संस्थान भीलवाड़ा की ओर से आयोजित तथा कला एवं संस्कृति विभाग राजस्थान सरकार, आरसीएम और नगर निगम भीलवाड़ा द्वारा प्रायोजित प्रमोद भसीन समर्पित भीलवाड़ा नाट्य महोत्सव के अंतर्गत युवा नाट्य समारोह का समापन गरिमामय वातावरण में हुआ। अंतिम दिन रंगमंच प्रेमियों को विचारोत्तेजक और प्रभावशाली नाट्य प्रस्तुतियों का साक्षी बनने का अवसर मिला।

कार्यक्रम की शुरुआत टीवी अभिनेता नरेंद्र गुप्ता, हंसराम   महाराज, तिलोक   छाबड़ा, राघवेंद्र रावतरावत और डॉ अर्जुन देव   चारण द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुई। सुबह रसधारा संस्थान में आयोजित रंग वार्ता में अरु व्यास, राघवेंद्र रावत और डॉ अर्जुन देव चारण ने नाटक डाकघर और नदी प्यासी थी के मंचन पर अपने विचार साझा किए और रंगमंच की सामाजिक भूमिका पर चर्चा की।

शाम पांच बजे साक्षात सभागार मिनी ऑडिटोरियम में कृष्ण चंदर की प्रसिद्ध व्यंग्यात्मक कहानी जामुन का पेड़ का मंचन किया गया। नाटक का निर्देशन गुरमिंदर सिंह पूरी ने किया। यह प्रस्तुति प्रशासनिक उदासीनता और सरकारी फाइलों की जटिलता पर तीखा व्यंग्य प्रस्तुत करती है। कहानी एक ऐसे व्यक्ति के इर्द गिर्द घूमती है जो जामुन के पेड़ के नीचे दब जाता है, लेकिन विभागीय औपचारिकताओं और निर्णय में देरी के कारण उसकी जान नहीं बच पाती। मंच पर ईश्वर दत्त माथुर, राजेंद्र शर्मा, लोकेश कुमार सिंह साहिल, दीपक कथूरिया, मोईनुद्दीन खान, नीरज गोस्वामी, अशोक माहेश्वरी, धनराज दाधीच और गुरमिंदर सिंह पूरी ने प्रभावशाली अभिनय किया। प्रकाश व्यवस्था अनिल मारवाड़ी और संगीत जितेंद्र शर्मा ने संभाला।

इसके बाद शाम सात बजे टाउन हॉल में जोधपुर से आई टीम द्वारा रघुनंदन त्रिवेदी लिखित कहानी खांचे का मंचन किया गया, जिसका निर्देशन अरु स्वाति व्यास ने किया। नाटक का कथानक विनायक आचार्य के जीवन पर आधारित था, जो अनुशासन और गंभीरता के नाम पर जीवन की खुशियों से दूर रहता है और अंततः अधूरी इच्छाओं के साथ जीवन समाप्त कर देता है। यह प्रस्तुति जीवन के हर पड़ाव को जीने का गहरा संदेश देती है। मंच पर लक्ष्मण सोलंकी, धनुष टाक, कृष्णकांत व्यास, ख्वाहिश स्वरूप व्यास, आदित्य नारायण, अंश बंसल, कृष्णा प्रजापत, योगेश बिश्नोई, नवजीत शर्मा और राजेश बिश्नोई ने सशक्त अभिनय किया। प्रकाश डिजाइन अरु व्यास, परिधान डिजाइन स्वाति व्यास और मंच सज्जा में लवजीत शर्मा, योगेश बिश्नोई व तनुज टांक का योगदान रहा।

नाट्य प्रस्तुतियों के पश्चात मुंबई से पधारे टीवी अभिनेता नरेंद्र गुप्ता को रसधारा संस्थान के पदाधिकारियों और वरिष्ठ रंगकर्मियों द्वारा स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। समापन अवसर पर उपस्थित दर्शकों और रंगमंच प्रेमियों ने नाट्य महोत्सव की सराहना करते हुए इसे भीलवाड़ा की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने वाला आयोजन बताया।

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