एनजीटी ने राजस्थान में वाहन प्रदूषण पर सख्त रुख अपनाया, जाजू की याचिका पर छह अधिकारियों को नोटिस
भीलवाड़ा,।राजस्थान में बढ़ते वाहन प्रदूषण और ग्रीन टैक्स के कथित दुरुपयोग को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने सख्त रुख अपनाया है। पर्यावरणविद बाबूलाल जाजू द्वारा दायर याचिका पर 8 जनवरी को हुई सुनवाई में एनजीटी सेंट्रल ज़ोन बेंच भोपाल ने परिवहन आयुक्त, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित छह वरिष्ठ अधिकारियों को नोटिस जारी किया है।
जाजू ने याचिका में कहा कि राजस्थान में वाहनों से उत्पन्न प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है, जिससे दमा, ब्रोंकाइटिस, सीओपीडी और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियां फैल रही हैं। इसका सबसे ज्यादा असर बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं पर पड़ रहा है।
याचिका में बताया गया कि राज्य सरकार ने वर्ष 2017 में प्रदूषण नियंत्रण के लिए ग्रीन टैक्स लागू किया था। सूचना के अधिकार से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार 2015-16 से 2024-25 तक लगभग 2009.66 करोड़ रुपए ग्रीन टैक्स के रूप में वसूले गए, लेकिन यह राशि हरियाली बढ़ाने और वायु प्रदूषण नियंत्रण में उपयोग नहीं की गई। जाजू ने चेतावनी दी कि प्रदेश में वन क्षेत्र 13 प्रतिशत से घटकर 9 प्रतिशत रह गया है और वनों की सघनता भी 0.8 से 0.3 रह गई है।
एनजीटी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सचिव रोड ट्रांसपोर्ट एवं हाईवे मंत्रालय, परिवहन आयुक्त राजस्थान, सदस्य सचिव राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, प्रमुख सचिव पर्यावरण, प्रमुख सचिव नगरीय विकास और प्रधान मुख्य वन संरक्षक को नोटिस जारी किया। इसके साथ ही एनजीटी ने एक संयुक्त जांच समिति का गठन किया है, जिसमें पर्यावरण विभाग, परिवहन विभाग, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधि शामिल होंगे। समिति स्थल का निरीक्षण कर ग्रीन टैक्स के उपयोग और प्रदूषण नियंत्रण पर छह सप्ताह में रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
मामले की अगली सुनवाई 23 मार्च 2026 को होगी। जाजू ने कहा कि यदि ग्रीन टैक्स की राशि का सही उपयोग होता तो राजस्थान के कई शहर जहरीली हवा से प्रभावित नहीं होते। उन्होंने मांग की कि ग्रीन टैक्स की राशि पारदर्शिता के साथ केवल प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण में ही खर्च की जाए।
