भीलवाड़ा में हनीट्रैप — सोशल‑प्रोफाइल से फंसाकर दर्जनों शिकार, कारोबारी से ₹12 लाख से अधिक की ठगी

Update: 2026-03-25 16:50 GMT

 

भीलवाड़ा हलचल सोशल मीडिया में फर्जी प्रोफाइल और उस पर किसी खूबसूरत लड़की का चेहरा हनी ट्रैप का मुख्य हथियार होता है। इस जाल में शिकार फंसता तो अपनी मर्जी से है लेकिन इससे बाहर निकलना उसके वश में नहीं रहता। सामने वाला उसे जब तक चाहता है प्रयोग करता है। वही  भीलवाड़ा में ऐसे मामले बढ़े रहे हे  लेकिन तरिके कुछ अलग हे बल्कि मिलिग गिरोह यहां मकान देखने , नौकरी के बहाने ,होटल में ले जाने जैसे बहाने से अपने शिकार को   फ़ासते हे , ऐसे ही एक मामले में १२ लाख से ज्यादा रुपीर लुटा चुका कपड़ा कारोबारी पुलिस अधिकारियो तक भी गया लिखित शिकायत भी की मगर ... 

हनी ट्रैप के अभी तक जो भी मामले सामने आए हैं, उनमें सोशल मीडिया के माध्यम से ही शिकार के हैं। खूबसूरत चेहरे वाली कोई लड़की सामने वाले को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजती है। एक बार इस रिक्वेस्ट को स्वीकार करते ही आपसे जुड़ी अधिकांश जानकारी हनी ट्रैप करने वाले पर पहुंच जाती है। इसके बाद चैटिंग का सिलसिला शुरू हो जाता है। कुछ सप्ताह या महीने तक सामान्य बातचीत होती रहती है।

 

इस दौरान संबंधित के बारे में काफी जानकारी जुटा ली जाती है। इसके बाद विश्वास जीतने के लिए ईमेल और मोबाइल नंबर का आदान-प्रदान करते हैं। इस जाल को फेंकने के बाद शिकार पूरी तरह वश में आ जाता है। खूबसूरत चेहरे की कशिश और लच्छेदार बातों से हनी ट्रैप में फंसा व्यक्ति अपने सारे राज उगल देता है। कई बार ऐसा होता है कि फर्जी प्रोफाइल बनाकर पुरुष ही महिला बनकर बात करते हैं। यदि उनके हाथों शिकार की आपत्तिजनक तस्वीर या कोई जानकारी लग जाती है तो उसे ब्लैकमेल करने लगते हें। जाल में फंसे व्यक्ति को वास्तविकता का पता चलता है तब तक काफी देर हो चुकी होती है।

विदेशी लड़कियों के चेहरे का प्रयोग

हनी ट्रैप करने वाले वर्चुअल वल्र्ड के शातिर अपनी प्रोफाइल पर विदेशी लड़कियों के फोटो लगाते हैं। इसके पीछे उनकी सोची समझी साजिश होती है। क्योंकि किसी भारतीय युवती या अभिनेत्री एवं मॉडल का फोटो लगाने पर सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाले लोग उसे तत्काल पहचान जाते हैं। जबकि विदेशी मॉडल या युवती को नहीं पहचानते हैं। इसलिए आसानी हनी ट्रैप के शिकार होकर जाल में फंस जाते हैं। युवतियां अपने को अमेरिकन या यूरोपीय देश का बताती हैं।

हालांकि भीलवाड़ा में जो हनी ट्रेप के मामले सामने आये हे उनमे से कुछ तो चर्चा में ही रहे थानों तक मामले पहुंचने के बाद करोड़ और लाखो में समझोत हो गए  , जबकि कुछ मामले भी दर्ज हुए लेकिन वही भी निपट गए , हाल ही में ऐसे तीन मामलो की चर्चा हे इनमे एक का मामला दर्ज नहीं हुआ लेकिन जांच चल रही हे जबकि दो मामले दर्ज ुये इनमे एक में दोदिन पहले ही भाई भीं की गिरफ्तारी हो गई जबकि  दूसरे में समझौता हो गया , जबकि एक मामला तो ठाणे तक ही नहीं पहुंचा और दो लाख दर्जन में निपट गया ,

  जांच हो तो सफेद पॉश चेहरे सामने आ सकते हे , और हनीट्रैप के लिए बना गठजोड़ भी उजागर हो सकता हे 

हनी ट्रैप से बचने के उपाय

अज्ञात लोगों से सावधान रहें: अज्ञात लोगों से मिलने या बात करने से पहले सावधानी बरतें

व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें: अपनी व्यक्तिगत जानकारी, जैसे कि पता, फोन नंबर, या वित्तीय जानकारी, किसी अज्ञात व्यक्ति के साथ साझा न करें

अनजान लोगों के साथ अकेले न रहें: अनजान लोगों के साथ अकेले न रहें, खासकर यदि आप उन्हें अच्छी तरह से नहीं जानते हैं

सोशल मीडिया पर सावधान रहें: सोशल मीडिया पर अज्ञात लोगों से दोस्ती करने या व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से पहले सावधानी बरतें

अनजान लिंक या ईमेल पर क्लिक न करें: अनजान लिंक या ईमेल पर क्लिक न करें, क्योंकि वे मैलवेयर या फ़िशिंग हमलों के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं

पासवर्ड और व्यक्तिगत जानकारी सुरक्षित रखें: अपने पासवर्ड और व्यक्तिगत जानकारी सुरक्षित रखें, और उन्हें किसी अज्ञात व्यक्ति के साथ साझा न करें

हनी ट्रैप का एक तरीका ये भी

फ्रॉड फेसबुक फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजते हैं या फिर सोशल मीडिया के माध्यम से आप से जुड़ जाते हैं. बातचीत करने के लिए पर्सनल नंबर मांगते हैं और फिर एक वीडियो काल के जरिए या तो अश्लील वीडियो बनाते हैं या फिर ऐसी बातचीत को रिकार्ड करते हैं जो बेहद गोपनीय होती है. फिर शुरू होता 'खेल'.


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**भीलवाड़ा।** सोशल मीडिया पर फर्जी खूबसूरत प्रोफ़ाइल से शुरू होने वाला हनी‑ट्रैप अब और खतरनाक रूप अपना रहा है। केवल चैट और वॉट्सऐप कॉल तक सीमित नहीं — गिरोह **मकान देखने, नौकरी का झांसा और होटल में बुलाकर** अपने शिकार को दबाव में लेकर लाखों वसूलने लगे हैं। शहर के एक कपड़ा कारोबारी का आरोप है कि उसे इस जाल में फंसा कर लगभग **₹12 लाख** से ज्यादा की ठगी की गई; पीड़ित ने पुलिस को लिखित शिकायत दी, पर कई मामले समझौते या दबाव में खत्म कर दिए गए।

घटना‑व्यवहार — कैसे गिरोह फंसाते हैं:

हनी‑ट्रैप के सामने आए मामलों में पैटर्न एक सा है — किसी खूबसूरत लड़की का फर्जी अकाउंट बनाकर फ्रेंड‑रिक्वेस्ट भेजना; रिक्वेस्ट स्वीकार होते ही शिकार की प्रोफ़ाइल व निजी जानकारी इकट्ठा कर लेना; कुछ सप्ताह‑महीनों तक सामान्य बातचीत और भरोसा जीतना; फिर फोन, ईमेल या व्हाट्सऐप पर और ज्यादा निजी नंबर व ईमेल माँगना। कुछ मामलों में पुरुष ही महिला बनकर बात करते हैं। जब किसी आपत्तिजनक फोटो/वीडियो या संवेदनशील जानकारी तक पहुँच जाती है तो उसे रिकॉर्ड कर ब्लैकमेलिंग शुरू कर दी जाती है।

गिरोह की साजिश में 'विदेशी चेहरा' का प्रयोग:

अक्सर गिरोह विदेशी मॉडल या विदेशी युवतियों की तस्वीरें लगाते हैं — ताकि पहचानना मुश्किल हो और शिकार सहजता से भरोसा कर लें। वे खुद को अमेरिकन या यूरोपीय बताते हैं, जिससे शिकार का संदेह कम रहता है।

मामलों की स्थिति — शिकायत, समझौता और गिरफ्तारी:

भीलवाड़ा में हालिया जांचों में तीन प्रमुख मामलों की चर्चा रही — एक में गिरफ्तारी हुई, एक में समझौता हुआ और एक मामला थाने तक दर्ज नहीं हुआ मगर आरोप है कि दो लाख से लेकर करोड़ों तक के समझौते हुए। कई पीड़ितों ने पैसे देकर मामले को शांत कराया, जबकि कुछ ने पुलिस शिकायत दर्ज कराई।

क्यों यह खतरनाक है:

एक बार शिकार जाल में फँस गया तो उसे अपनी मरज़ी से बाहर निकलना संभव नहीं रहता — सामने वाला जब तक चाहे प्रयोग करता है और बदनामी की धमकी देकर हर मांगे पूरी करवाता है। समझौता करने से गिरोह को बढ़ावा मिलता है और नए शिकार बनते रहते हैं।

पुलिस और नागरिकों के लिए सुझाव (तुरंत करें):

• अज्ञात फ्रेंड‑रिक्वेस्ट स्वीकार करने से पहले सावधानी बरतें — प्रोफ़ाइल जाँचें।

• किसी अजनबी को अपना पता, बैंक‑डिटेल या व्यक्तिगत तस्वीरें न दें।

• किसी संदिग्ध कॉल/बात‑चीत की रिकॉर्डिंग या स्क्रीनशॉट रखें।

• ब्लैकमेल की स्थिति में पैसों से समझौता न करें — तुरंत नज़दीकी साइबर सेल/थाना को सूचित करें और कानूनी मदद लें।

• अनजान लिंक/फाइल पर क्लिक न करें; किसी अज्ञात से मिलने अकेले न जाएँ।

• पासवर्ड व द्वि‑घटक सत्यापन (2FA) सक्रिय रखें।

फैसला अब: जांच तेज होनी चाहिए

स्थानीय स्रोतों के अनुसार यदि पुलिस और साइबर सेल मिलकर फर्जी प्रोफाइलों और उनके पेमेंट‑न्यास तक पहुंचें तो कई ‘सफेद‑पोश’ चेहरों के पीछे का नेटवर्क बेनकाब किया जा सकता है। पीड़ितों को भी चाहिए कि वे किसी समझौते या भय के आगे झुकने के बजाय लिखित सबूत के साथ शिकायत करें — तभी गिरोह की जड़ तक पहुँचा जा सकेगा।

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**फैक्ट‑बॉक्स**

• अनुमानित वसूली: लगभग ₹12 लाख (एक मामले में)।

• हालिया स्थिति: 3 प्रमुख मामले चर्चा में — 1 गिरफ्तारी, 1 समझौता, 1 बिना शिकायत।

• प्रमुख तरीक़े: फर्जी प्रोफाइल, विदेशी चेहरे, नौकरी/मकान‑झांसा, होटल‑बुलावा, वीडियो/फोटो रिकॉर्डिंग।

यदि आप चाहें तो मैं इसी खबर को **एक कॉलम‑लेआउट (फ्रंट‑पेज के लिए) — बड़ा हेडलाइन + सबहेड + तीन प्रमुख पैराग्राफ + सावधानियाँ** के रूप में तैयार करके दे दूँ।

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