गर्भपात की दवा बनी मौत का कारण, झाड़ फूंक के भरोसे गई जान, अस्पताल में युवती ने तोड़ा दम

Update: 2026-01-17 13:12 GMT

 अंबिकापुर छ.ग.  । सरगुजा जिले से इंसानियत और लापरवाही को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। धौरपुर थाना क्षेत्र के ग्राम सरईडीह की एक युवती की गर्भपात की दवा सेवन करने के बाद इलाज में देरी और झाड़ फूंक के अंधविश्वास के चलते दर्दनाक मौत हो गई। यह घटना पूरे इलाके में सनसनी का कारण बन गई है।

जानकारी के अनुसार युवती पिछले 10 से 15 दिनों से बीमार थी, लेकिन परिजन उसे अस्पताल ले जाने के बजाय गांव में झाड़ फूंक कराते रहे। हालत लगातार बिगड़ती गई, लेकिन अंधविश्वास हावी रहा। आखिरकार 12 जनवरी को जब युवती की स्थिति गंभीर हो गई, तब उसकी फुआ और होने वाला पति उसे अंबिकापुर के होलीक्रॉस अस्पताल लेकर पहुंचे।

अस्पताल में जांच के दौरान चौंकाने वाला खुलासा हुआ। डॉक्टरों ने बताया कि युवती करीब एक माह की गर्भवती थी और उसने लगभग 30 दिन पहले गर्भपात की दवा का सेवन किया था। इस बात की जानकारी परिजनों को पहले नहीं थी। इलाज के दौरान युवती की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ और 16 जनवरी को उसने दम तोड़ दिया।

मृतिका के पिता ने पुलिस को बताया कि वर्ष 2025 में बेटी का रिश्ता धौरपुर थाना क्षेत्र के ग्राम डुमरडीह निवासी अमर अगरिया से तय हुआ था। यह भी सामने आया है कि युवती का अपने मंगेतर से पहले से मिलना जुलना था। पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि गर्भ ठहरने के पीछे वही कारण था या नहीं।

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि गंभीर हालत में भी समय रहते युवती को अस्पताल क्यों नहीं ले जाया गया। झाड़ फूंक और अंधविश्वास के कारण एक युवा जिंदगी खत्म हो गई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

यह घटना एक बार फिर बताती है कि अज्ञानता, अंधविश्वास और समय पर इलाज न मिलना किस तरह जानलेवा साबित हो सकता है। पूरे क्षेत्र में इस घटना को लेकर शोक और आक्रोश का माहौल है।

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