श्रद्धांजलि: अलविदा सुरों की मलिका—आशा ताई
संगीत जगत की अनमोल रत्न और करोड़ों दिलों पर दशकों तक राज करने वाली सुप्रसिद्ध गायिका आशा भोसले (आशा ताई) के निधन पर हर आँख नम है। उनके सुरों के जादू और गीतों की विरासत को शब्दों में पिरोते हुए संजय एम तराणेकर ने अपनी काव्यमयी श्रद्धांजलि अर्पित की है:
रात की ख़ामोशी में 'चाँदनी' मुस्कुराती है,
कहीं दूर से उनकी आवाज़ चली आती है।
कभी “पिया तू अब तो आजा...” की धुन,
ये दिल को मचलाने लगती 'गीत' को सुन।
कभी “दम मारो दम” की ज़बरदस्त मस्ती,
रूह में रंग भर जाती है आशा ताई हस्ती।
हर युग, हर दौर में उनका 'जादू' हैं कायम,
सदियों गूंजेगा ये सुर हर पीढ़ी को नायब।
जो उन्होंने हमें दिया है ग़ज़ल या हो ठुमरी,
देखी फिल्मी गीतों की 'रंग-रंगीली' झुमरी।
मधुर स्वर की छाया हर दिल को छू जाती,
'संगीत' की रंगीन दुनिया में सबको रमाती।
आशाजी ने लिखा है संगीत में अपना नाम,
कोई जब गीत बजे दिल को रख लेते थाम।
उनकी मीठी तान सुन के हर दर्द खो जाता,
आज आँखें नम हमारी तोड़ गईं जैसे नाता।
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