13 साल का दर्द थमा: देश के पहले इच्छामृत्यु मामले में हरीश राणा का निधन

Update: 2026-03-24 15:10 GMT


नई दिल्ली | देश के चिकित्सा और कानूनी इतिहास के पहले इच्छामृत्यु मामले में 31 वर्षीय हरीश राणा ने मंगलवार शाम 4:10 बजे दिल्ली एम्स के ऑन्कोलॉजी यूनिट (IRCH) में अंतिम सांस ली। पिछले 13 वर्षों से कोमा में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे हरीश को सुप्रीम कोर्ट के 11 मार्च के ऐतिहासिक आदेश के बाद 'पैसिव यूथेनेशिया' (इच्छामृत्यु) दी गई थी।

एम्स में डॉ. सीमा मिश्रा की देखरेख में हुआ इलाज

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार हरीश को 14 मार्च को एम्स शिफ्ट किया गया था, जहाँ विभाग की अध्यक्ष डॉ. सीमा मिश्रा उनकी देखभाल कर रही थीं। एम्स प्रशासन ने 16 मार्च को उनकी फीडिंग ट्यूब (खाने की नली) हटा दी थी, जिसके बाद मंगलवार को उनकी प्राकृतिक मृत्यु हुई। हरीश के पिता अशोक राणा ने बताया कि बुधवार सुबह 9 बजे दक्षिण दिल्ली के ग्रीन पार्क में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

भावुक विदाई और मां का संघर्ष

14 मार्च को जब हरीश को घर से एम्स ले जाया जा रहा था, तब ब्रह्मकुमारी लवली ने उन्हें टीका लगाकर विदा किया था। 11 मार्च को आए फैसले के बाद उनकी मां निर्मला देवी ने रूंधे गले से कहा था कि उन्होंने बेटे के इलाज के लिए हर संभव प्रयास किए और बड़े से बड़े अस्पतालों के चक्कर काटे, लेकिन अब वे केवल उसकी इस असहनीय पीड़ा से मुक्ति चाहती थीं। एम्स ने अस्पताल में ही मां-पिता के रुकने की व्यवस्था की थी ताकि वे अंतिम समय में बेटे के साथ रह सकें।

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