23 साल बाद बना दुर्लभ संयोग, पटना के गंगा घाटों पर उमड़ा आस्था का सैलाब

Update: 2026-01-14 03:34 GMT


​पटना। साल 2026 की शुरुआत आस्था और परंपराओं के एक अद्भुत संगम के साथ हुई है। बिहार की राजधानी पटना में इस बार शटतिला एकादशी और मकर संक्रांति का एक साथ होना चर्चा का विषय बना हुआ है। ज्योतिष गणना के अनुसार, यह दुर्लभ संयोग पूरे 23 साल बाद बना है, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा गया।


​भोर से ही गूंजे 'हर-हर गंगे' के जयकारे

​बुधवार तड़के से ही पटना के प्रमुख गंगा घाटों (कलेक्टर घाट, गांधी घाट और एनआईटी घाट) पर श्रद्धालुओं का तांता लग गया। कड़ाके की ठंड के बावजूद भक्तों की आस्था भारी पड़ी। अहले सुबह से ही लोगों ने गंगा की लहरों में पवित्र डुबकी लगाई और सूर्य देव को अर्घ्य दिया।

​तिल और गुड़ के दान का विशेष महत्व

​मान्यता है कि शटतिला एकादशी पर तिल का छह रूपों में उपयोग और मकर संक्रांति पर खिचड़ी-तिल का दान अक्षय पुण्य प्रदान करता है। श्रद्धालुओं ने स्नान के पश्चात:

​भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना की।

​गरीबों और जरूरतमंदों को तिल, गुड़, कंबल और खिचड़ी का दान किया।

​पंडितों के अनुसार, इस दुर्लभ संयोग में किया गया दान सीधे वैकुण्ठ धाम की प्राप्ति कराता है।

​सुरक्षा के रहे कड़े इंतजाम

​भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आया। सभी प्रमुख घाटों पर:

​बैरिकेडिंग: गहरे पानी में जाने से रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए।

​SDRF की तैनाती: आपात स्थिति से निपटने के लिए बचाव दल नावों के साथ गश्त करते रहे।

​सीसीटीवी निगरानी: असामाजिक तत्वों पर नजर रखने के लिए कंट्रोल रूम से मॉनिटरिंग की गई।

​श्रद्धालुओं का कहना है कि ऐसा संयोग जीवन में बहुत कम बार देखने को मिलता है, जहां एक ही दिन दो बड़े पर्वों का पुण्य लाभ मिल रहा हो।

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