महाशिवरात्रि पर उज्जैन में बाबा महाकाल के दर्शनों को उमड़ा जनसैलाब

Update: 2026-02-15 09:30 GMT

उज्जैन  महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर मध्यप्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में आस्था का अद्भुत सैलाब उमड़ पड़ा। रात 2.30 बजे मंदिर के पट खोले गए और विशेष भस्मारती के साथ पूजा-अर्चना का सिलसिला शुरू हुआ। इस बार मंदिर के पट 44 घंटे तक लगातार खुले रहने की व्यवस्था की गई है। प्रशासन को अनुमान है कि महाशिवरात्रि पर करीब 10 लाख श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन करेंगे।

देशभर में शिवरात्रि का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है, लेकिन उज्जैन में इसका विशेष आध्यात्मिक महत्व है। यहां भस्मारती, विशेष श्रृंगार और शिव नवरात्रि के आयोजन के कारण श्रद्धालुओं की आस्था चरम पर रहती है। इस अवसर पर सेहरे का प्रसाद भी वितरित किया जाता है, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है।

पंचामृत अभिषेक और भस्मारती से भक्त भाव-विभोर

महाशिवरात्रि की अलसुबह बाबा महाकाल का विशेष पंचामृत अभिषेक किया गया। पंचामृत में दूध, दही, घी, शहद और खांडसारी शक्कर शामिल रहे। इसके बाद चंदन का लेप और सुगंधित द्रव्यों से पूजन हुआ। बाबा को उनकी प्रिय विजया से श्रृंगारित कर श्वेत वस्त्र पहनाए गए। झांझ, मंजीरे, ढोल-नगाड़ों और शंखनाद के बीच भस्मारती संपन्न हुई। इस दिव्य दृश्य को देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।

सेहरा सजावट और विशेष परंपरा

शिवरात्रि के अगले दिन बाबा का सेहरा सजाया जाता है और दोपहर में विशेष भस्मारती होती है। यह परंपरा वर्ष में केवल एक बार निभाई जाती है। सेहरे को प्रसाद स्वरूप श्रद्धालुओं में वितरित किया जाता है। मान्यता है कि इसे घर में रखने से सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।

दिनभर चला पूजन-अभिषेक का क्रम

भस्मारती के बाद दद्योदक आरती और भोग आरती संपन्न हुई। दोपहर 12 बजे उज्जैन तहसील की ओर से पूजन-अभिषेक किया गया। शाम को होल्कर और सिंधिया स्टेट की ओर से पूजन के बाद सायं पंचामृत पूजन और नित्य संध्या आरती हुई। रात्रि में कोटितीर्थ कुंड के तट पर स्थित कोटेश्वर महादेव का पूजन, सप्तधान्य अर्पण और पुष्प मुकुट श्रृंगार के बाद आरती की गई। देर रात 10.30 बजे से भगवान महाकालेश्वर का महाअभिषेक प्रारंभ हुआ, जिसमें 11 ब्राह्मणों ने रुद्रपाठ और वैदिक मंत्रों के साथ अभिषेक संपन्न कराया।

भस्म लेपन, पंचामृत पूजन और पांच प्रकार के फलों से अभिषेक के बाद भगवान को नवीन वस्त्र धारण कराए गए। चंद्र मुकुट, छत्र, त्रिपुंड और विविध आभूषणों से श्रृंगार किया गया। सेहरा आरती में मिष्ठान्न, फल और पंचमेवा का भोग अर्पित किया गया। 16 फरवरी 2026 को प्रातः सेहरा दर्शन के बाद दोपहर 12 बजे भस्मारती होगी और इसके साथ शिव नवरात्रि का पारणा किया जाएगा।

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