संसद में सियासी संग्राम: पीएम के बयान पर खरगे का करारा जवाब

By :  vijay
Update: 2026-03-24 19:20 GMT

नई दिल्ली  कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संकट को लेकर राज्यसभा में प्रधानमंत्री का भाषण भ्रम फैलाने का प्रयास था। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री का बयान बहुत देर में आया है। इससे जवाब से ज्यादा सवाल खड़े होते हैं।

संसद के ऊपरी सदन में कोविड-19 का हवाला देते हुए खरगे ने प्रधानमंत्री की आलोचना की। उन्होंने पूछा, क्या प्रधानमंत्री अब यह सुझाव दे रहे हैं कि 140 करोड़ भारतीयों को एक बार फिर अपने ही दम पर अपना गुजारा करना होगा, जबकि देश बढ़ते उर्जा संकट का सामना कर रहा है?

कांग्रेस अध्यक्ष ने सोशल मीडिया पोस्ट में क्या कहा?

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर राज्यसभा में विपक्ष के नेता खरगे ने कहा, राज्यसभा में प्रधानमंत्री का 20 मिनट का बयान ज्यादा से ज्यादा भ्रम फैलाने का प्रयास था। खरगे ने प्रधानमंत्री से तीन बुनियादी सवाल पूछे और स्पष्ट जवाब की मांग की।

प्रधानमंत्री से तीन सवालों पर मांगे जवाब

उन्होंने लिखा,पहला, प्रधानमंत्री ने अपने अस्थिर और बदलते कूटनीतिक रुख से भारत की रणनीतिक स्वायत्तता के संतुलन को बिगाड़ दिया,जो सभी सरकारों के दौरान हमारी विदेश नीति का एक अहम स्तंभ रहा है। उनकी हालिया इस्राइल यात्रा के बाद भारत को स्पष्ट कूटनीतिक परिणामों का सामना करना पड़ा है।

उन्होंने पूछा, प्रधानमंत्री इस स्पष्ट बदलाव के बारे में संसद और देश को विश्वास में लेने क्यों विफल रहे और भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को बहाल करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए हैं? कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, लगभग 1,100 नाविकों को ले जा रहे भारतीय ध्वज वाले करीब 30-40 जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे हुए हैं, जिनमें लगभग 10 हजार करोड़ रुपये का माल लदा हुआ है। प्रधानमंत्री ने व्यक्तिगत रूप से ईरानी राष्ट्रपति से दो बार बात की और विदेश मंत्री ने अपने ईरान के समकक्ष से कई बार संपर्क किया। इसके बावजूद अपने जहाजों के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने में विफल क्यों रहे हैं? चीन, रूस, जापान और अन्य मित्र देशों को सुरक्षित पारगमन की अनुमति क्यों दी जा रही है, जबकि भारतीय जहाज फंसे हुए हैं?

खरगे ने कहा, प्रधानमंत्री ने संसद में दावा किया कि भारत ने अपने उर्जा आयात को 27 से बढ़ाकर 41 देशों पर केंद्रित किया है। अगर ऐसा है, तो वर्मान में कौन से देश भारत को एलएनजी, एलपीजी और कच्चा तेल की आपूर्ति कर रहे हैं और कितनी मात्रा में? इससे भी अहम बात यह है कि अगर (आपूर्ति श्रृंखला) में विविधता लाई गई है, तो लोगों को अभी भी लंबी कतारों, कालाबाजारी और देशभर में कीमतों में भारी वृद्धि का सामना क्यों करना पड़ रहा है?

कोविड-19 से गई चार लाख से अधिक लोगों की जान'

उन्होंने कहा, संघर्ष शुरू हुए 25 दिन बीत चुके हैं। भारत एक गंभीर उर्जा संकट का सामना कर रहा है, जिसके लिए सरकार कहीं बेहतर तैयारी करनी चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने अब इस स्थिति की तुलना कोविड जैसी स्थिति से की है। देश महामारी के दौरान हुई उस भयावह पीड़ा को नहीं भूल सकता, जब चार लाख से अधिक लोगों की जान चली गई और अनगिनत नागरिक ऑक्सीजन जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष करते रहे।

उन्होंने आगे कहा, क्या प्रधानमंत्री अब यह कहना चाह रहे हैं कि 140 करोड़ भारतीयों को एक बार फिर अपने हाल पर छोड़ दिया जाए, क्योंकि देश उर्जा संकट, खाद्य, उर्वरक, लघु एवं मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) और महंगाई के बढ़ते दबावों का सामना कर रहा है? प्रधानमंत्री मोदी का यह बयान बहुत देर से आया है और जवाब से कहीं ज्यादा सवाल खड़े होते हैं।

पीएम ने सात अधिकार प्राप्त समूहों का किया गठन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज पश्चिम एशिया जंग के संभावित दीर्घकालिक प्रभावों से निपटने के लिए सात अधिकार प्राप्त समूहों के गठन की घोषणा की। उन्होंने राज्यों से संकट से निपटने के लिए टीम इंडिया दृष्टिकोण अपनाते हुए केंद्र के साथ मिलकर काम करने का आग्रह किया।

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