राहुल गांधी ने छात्रों से किया संवाद: वैश्विक युद्ध के मुहाने पर दुनिया, एआई और डाटा सुरक्षा में भारत पिछड़ा
केरल (कुट्टिकानम)। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को केरल के कुट्टिकानम स्थित मारियन कॉलेज के छात्रों से संवाद करते हुए वर्तमान वैश्विक हालात और घरेलू नीतियों पर अपनी बेबाक राय रखी। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संबंधों की जटिलताओं, एआई तकनीक, शिक्षा प्रणाली और मीडिया के राजनीतिकरण जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा की। गांधी ने चेतावनी दी कि दुनिया एक हिंसक दौर में प्रवेश कर रही है और भारत को अपनी विदेश और तकनीकी नीतियों को लेकर बेहद सतर्क रहने की आवश्यकता है।
अंतरराष्ट्रीय संकट और भारत पर असर
पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव पर गांधी ने कहा कि सतह पर यह अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच का युद्ध प्रतीत होता है, लेकिन असल में यह अमेरिका, चीन और रूस के बीच का शक्ति संघर्ष है। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपना महाशक्ति का रुतबा बचाना चाहता है, जबकि चीन तेजी से उसके करीब आ रहा है। ऊर्जा के लिए पश्चिम एशिया पर निर्भर होने के कारण इस संघर्ष का सीधा असर भारत पर पड़ेगा, जिससे ईंधन महंगा होगा और आर्थिक विकास धीमा पड़ेगा। चीन हमारी सीमा पर है और अमेरिका हमारा सहयोगी, इसलिए भारत को इस खतरनाक दौर में बिना किसी युद्ध में फंसे अपनी नीति स्पष्ट रखनी होगी।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डाटा नियंत्रण
एआई के क्षेत्र में भारत की स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि इस तकनीक में केवल अमेरिका और चीन ही प्रमुख खिलाड़ी हैं। गांधी का आरोप है कि हालिया समझौतों के तहत भारत का पूरा डाटा अमेरिका को सौंप दिया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि हम अपना डाटा दूसरों को सौंपते रहे और स्वयं कुछ उत्पादन नहीं किया, तो हम मुसीबत में पड़ जाएंगे। डाटा पर नियंत्रण के बिना भारत एआई क्रांति में पिछड़ जाएगा, जिससे सेवा और सॉफ्टवेयर क्षेत्र की महत्वपूर्ण नौकरियां खत्म हो सकती हैं।
उच्च शिक्षा पर वैचारिक प्रहार और मीडिया का दुरुपयोग
उच्च शिक्षा की स्थिति पर बोलते हुए गांधी ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति उनकी योग्यता के बजाय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से उनकी संबद्धता के आधार पर की जा रही है। उन्होंने भारतीय शिक्षा प्रणाली को इस विभाजनकारी दृष्टिकोण से बचाने की अपील की। इसके अलावा, उन्होंने मीडिया और सिनेमा के दुरुपयोग पर निशाना साधते हुए कहा कि फिल्मों और टेलीविजन का इस्तेमाल समाज को बांटने और कुछ खास लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में मीडिया का इस्तेमाल विरोधियों की आवाज दबाने और उन्हें बदनाम करने के लिए एक हथियार के तौर पर हो रहा है।
ईमानदार राजनीति का कठिन मार्ग
राजनीति में आने के इच्छुक युवाओं को स्पष्ट संदेश देते हुए राहुल गांधी ने इसे एक अप्रिय लेकिन महत्वपूर्ण कार्य बताया। उन्होंने कहा कि यदि कोई सही मकसद और निश्चित मूल्यों के साथ राजनीति में आता है, तो उसे संघर्ष करने और धक्के खाने के लिए तैयार रहना चाहिए। व्यक्तिगत लाभ के लिए राजनीति करना आसान है, लेकिन वैचारिक लड़ाई का रास्ता बेहद कठिन होता है। उन्होंने इस आम धारणा को खारिज किया कि राजनीति में ईमानदारी संभव नहीं है और कहा कि वे स्वयं इस बात की पड़ताल कर रहे हैं कि राजनीति में सत्यनिष्ठा और पारदर्शिता के साथ कितने आगे तक जाया जा सकता है।
