179 सरकारी कंपनियों के बोर्ड में एक भी महिला नहीं: लोकसभा में सरकार का जवाब, उठे सवाल
नई दिल्ली भारत सरकार ने सोमवार को लोकसभा में बताया कि सरकारी कंपनियों में महिलाओं की भागीदारी अभी भी सीमित है। सरकार के जवाब के अनुसार 179 सरकारी कंपनियों में, जिनमें सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां (PSEs) भी शामिल हैं, अभी तक बोर्ड में एक भी महिला निदेशक नहीं हैं। यह कंपनियों के कानून के तहत जरूरी है कि कुछ कंपनियों में कम से कम एक महिला निदेशक नियुक्त हो।
बता दें कि कंपनी अधिनियम 2013 के तहत हर सूचीबद्ध कंपनी और हर अन्य सार्वजनिक कंपनी जिनका पेड-अप शेयर कैपिटल 100 करोड़ रुपये या उससे अधिक है, या जिनका टर्नओवर 300 करोड़ रुपये या उससे अधिक है, उन्हें अपने बोर्ड में कम से कम एक महिला निदेशक नियुक्त करनी होती है।
लोकसभा में हर्ष मल्होत्रा का जवाब
मामले में कॉरपोरेट मामलों के राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने लोकसभा में लिखित जवाब में कहा कि कुल 708 सरकारी कंपनियों में से 529 ने महिला निदेशक नियुक्त की हैं, जबकि 179 कंपनियों ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने कहा कि महिला निदेशक नियुक्ति के न्यूनतम मानक का पालन न करना कंपनियों और प्रशासनिक कारणों से अलग-अलग है।
क्या कहती है रिपोर्ट, जानिए
राज्य मंत्री मल्होत्रा ने इस बात पर भी जोर दिया कि सरकार की ओर से इन कंपनियों पर लगाए गए जुर्माने का डेटा केंद्रीकृत रूप से उपलब्ध नहीं है। हाल ही के वित्तीय वर्ष में 13 मार्च तक, सरकारी कंपनियों के बोर्ड में 668 महिला निदेशक और 3,423 पुरुष निदेशक थे। इस रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि सरकारी कंपनियों में महिला नेतृत्व की संख्या अभी भी अपेक्षाकृत कम है और सुधार की जरूरत है।